UP New Jail: उत्तर प्रदेश में जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए राज्य सरकार ने नई जिला जेलों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया है। जेल प्रशासन एवं सुधार विभाग ने प्रदेश के छह जिलों में नई जिला जेलें बनाने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन जेलों के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। नई जेलों के तैयार होने से राज्य में कुल 7,732 कैदियों के लिए अतिरिक्त क्षमता विकसित होने की बात कही गई है।
इन छह जिलों में प्रस्तावित हैं नई जेलें
जेल प्रशासन विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक कानपुर नगर, औरैया, शाहजहांपुर, ज्ञानपुर यानी भदोही, मुरादाबाद और ललितपुर में नई जिला जेलों का निर्माण प्रस्तावित है। इन जिलों में जेलों की जरूरत और उपलब्ध बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन की मंजूरी के बाद जमीन से जुड़े कार्य और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
मंजूरी के बाद शुरू होगी निर्माण प्रक्रिया
नई जिला जेलों के प्रस्ताव को शासन से हरी झंडी मिलने के बाद संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मौजूदा जेलों में कैदियों की संख्या के दबाव को कम करना और जेल प्रशासन के लिए पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नई क्षमता बनने से सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
छह अन्य जिलों में पहले से जारी जेल निर्माण
नई जेलों के प्रस्ताव के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के छह अन्य जिलों में जिला जेलों का निर्माण पहले से चल रहा है। इनमें अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश की जेल व्यवस्था में 6,156 कैदियों के लिए अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की जानकारी दी गई है।
अमेठी और महोबा जेल निर्माण अंतिम चरण में
निर्माण की प्रगति की बात करें तो अमेठी जिला जेल का काम 98 प्रतिशत से अधिक पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं महोबा में भी निर्माण कार्य 93 प्रतिशत से ज्यादा पूरा हो चुका है। दोनों परियोजनाएं अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। निर्माण पूरा होने और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इन्हें संचालन के लिए समर्पित किया जा सकता है।
2017 से बढ़ी प्रदेश में जेलों की संख्या
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में कुल 70 जेलें थीं। वर्ष 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 77 हो गई है। इसी अवधि में जेलों की कुल स्वीकृत क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2017 में जहां प्रदेश की जेलों में करीब 58,400 कैदियों की क्षमता थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 77,673 तक पहुंच गया है।
ओवरक्राउडिंग अनुपात में भी आई कमी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जेलों में क्षमता के मुकाबले कैदियों की संख्या का अनुपात भी पिछले वर्षों में कम हुआ है। वर्ष 2017 में ओवरक्राउडिंग रेशियो 1.77 बताया गया था, जो 2026 में घटकर 1.03 रह गया। हालांकि, 1 से अधिक अनुपात यह दर्शाता है कि उपलब्ध क्षमता की तुलना में कैदियों की संख्या अभी भी अधिक है।
सात नई जेलों से बढ़ी थी क्षमता
वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में चित्रकूट, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली में सात नई जेलें शुरू की गईं। इन जेलों के संचालन से कुल 10,495 कैदियों के लिए अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की जानकारी दी गई है। अब छह प्रस्तावित और छह निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं के जरिए इस क्षमता को और बढ़ाने की तैयारी है।
जेल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से घटेगा दबाव
छह नई प्रस्तावित जेलों और छह निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश की जेल व्यवस्था में हजारों अतिरिक्त कैदियों के लिए जगह उपलब्ध होगी। सरकार की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य मौजूदा जेलों पर क्षमता से अधिक कैदियों के दबाव को कम करना, प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना और जेलों के बुनियादी ढांचे का विस्तार करना है।
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