Jamui Case : बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से कथित छेड़खानी और मारपीट के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिससे नाबालिग की पहचान उजागर होने का सवाल खड़ा हुआ। मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई यह तस्वीर कुछ समय बाद हटा दी गई। इसके बाद आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा।
पीड़ित परिवार से मिले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
रिपोर्टों के मुताबिक, जमुई की नाबालिग पीड़िता अपने परिवार के सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने परिवार को मामले में तेज गति से न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि मुकदमे की सुनवाई तेजी से कराने और दोषियों को एक महीने के भीतर कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसी मुलाकात की एक तस्वीर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की गई थी।
तस्वीर हटने के बाद तेजस्वी यादव का हमला
मुख्यमंत्री की पोस्ट हटाए जाने के बाद तेजस्वी यादव ने उसका स्क्रीनशॉट अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तस्वीर के जरिए नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो गई। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री पर POCSO कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपने बयान में मुख्यमंत्री के खिलाफ बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल भी किया। हालांकि, ये आरोप तेजस्वी यादव और आरजेडी की ओर से लगाए गए हैं।
POCSO में बच्चे की पहचान को लेकर क्या प्रावधान है?
POCSO Act की धारा 23 बच्चों से जुड़े यौन अपराधों की रिपोर्टिंग और मीडिया कवरेज से संबंधित है। इसके तहत बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी के प्रकाशन पर प्रतिबंध है। आधिकारिक मॉडल गाइडलाइंस में भी नाम, पता या अन्य ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की बात कही गई है, जिससे बच्चे की पहचान सामने आ सकती है। ऐसे मामलों में बच्चे की निजता और सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है।
जमुई में 19 सितंबर को हुई थी घटना
मामला 19 सितंबर की शाम का बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, कोचिंग से लौट रहे एक नाबालिग लड़के और लड़की को जमुई में कुछ लोगों के समूह ने रास्ते में रोक लिया था। दोनों को घेरकर पूछताछ और मारपीट की गई तथा लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़खानी की गई। घटना का वीडियो बनाए जाने और बाद में सोशल मीडिया पर फैलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। मामले में POCSO एक्ट समेत संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।
वीडियो वायरल होने पर पुलिस की कार्रवाई तेज
पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़े कई आरोपियों की पहचान वीडियो और जांच के आधार पर की गई। शुरुआती कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया और अन्य आरोपियों की तलाश जारी रही। पुलिस ने उन सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की, जिनसे नाबालिग की पहचान सामने लाने वाला वीडियो प्रसारित किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
मीसा भारती ने भी मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई मांगी
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने भी मुख्यमंत्री की कथित पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए बिहार पुलिस से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ पुलिस नाबालिग की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स पर कार्रवाई कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री के पोस्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे मामले ने बिहार में कानून-व्यवस्था, नाबालिगों की सुरक्षा और पीड़ित की निजता को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
मामले पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी
जमुई की घटना के बाद बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गए हैं। आरजेडी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, जबकि प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई की जा रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री की कथित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नया विवाद सामने आया है। अब इस मामले में आगे की पुलिस और कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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