FIFA World Cup 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़े नियमों वाली इमिग्रेशन पॉलिसी का असर अब खेल जगत पर भी साफ दिखने लगा है। लैटिन अमेरिका की सबसे दिग्गज और मजबूत फुटबॉल टीमों में से एक, उरुग्वे की राष्ट्रीय टीम (‘ला सेलेस्टे’) को वर्ल्ड कप के महामुकाबले से ठीक पहले एक बड़े संकट का सामना करना पड़ा है। सख्त प्रशासनिक नियमों के कारण उरुग्वे की टीम को मैच शुरू होने के महज 24 घंटे पहले तक अमेरिका में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिल सकी। इससे पहले ईरान की टीम भी इस तरह की कड़ी पाबंदियों का सामना कर चुकी है, लेकिन इस बार निशाना फुटबॉल की एक वैश्विक महाशक्ति बनी है।

मेक्सिको में अटकी टीम और मैच पर मंडराया संकट
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उरुग्वे को भारतीय समयानुसार मंगलवार सुबह 3:30 बजे सऊदी अरब के खिलाफ मैच खेलकर अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत करनी थी। हालांकि, इस महत्वपूर्ण मुकाबले से ठीक पहले अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने टीम को एंट्री देने से साफ इनकार कर दिया, जिसके कारण पूरी टीम फिलहाल मेक्सिको में ही फंसी हुई है। इस अप्रत्याशित संकट पर उरुग्वे फुटबॉल फेडरेशन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां उनके नियंत्रण से बिल्कुल बाहर हैं। टीम अभी मेक्सिको में रुकी हुई है और अमेरिकी अधिकारियों से जरूरी मंजूरी (परमिशन) मिलने का इंतजार कर रही है। फेडरेशन लगातार संबंधित विभागों के संपर्क में है और जैसे ही नया यात्रा शेड्यूल तय होगा, टीम अमेरिका के लिए उड़ान भरेगी।

दस्तावेजों की कमी बनी अमेरिका में एंट्री की मुख्य बाधा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उरुग्वे के खिलाड़ियों और स्टाफ के कुछ महत्वपूर्ण ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स गायब थे। वर्तमान अमेरिकी इमिग्रेशन नीति के कड़े प्रावधानों के तहत, बिना पूरे और वैध दस्तावेजों के किसी भी विदेशी नागरिक या टीम को देश की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी कानूनी अड़चन की वजह से उरुग्वे की मुश्किलें अचानक बढ़ गईं। हालांकि, फुटबॉल फेडरेशन और टूर्नामेंट के आयोजक इस गंभीर कानूनी और प्रशासनिक समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि उरुग्वे की टीम को किसी वैकल्पिक चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए सीधे फ्लोरिडा ले जाने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि वे समय पर अपने मैच के लिए पहुंच सकें।
ट्रंप सरकार की खेल-विरोधी नीतियों पर उठते गंभीर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन की आप्रवासन नीति के कारण किसी अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में इस तरह का व्यवधान आया हो। इससे पहले ईरानी फुटबॉल टीम को भी अपना ट्रेनिंग कैंप अमेरिका के बजाय मेक्सिको में शिफ्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इतना ही नहीं, ईरानी टीम को अमेरिकी धरती पर मैच खेलने के तुरंत बाद रातों-रात देश छोड़ने का कड़ा फरमान भी सुनाया गया था।
इसके अलावा, सोमाली मूल के रेफरी उमर आर्टन के साथ हुआ दुर्व्यवहार भी काफी चर्चा में रहा है। मियामी एयरपोर्ट पर उतरते ही सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे लगभग 11 घंटे तक लंबी पूछताछ की थी। बाद में उन्हें बिना कोई ठोस कारण बताए, कैदियों के लिए बनी एक विशेष सेल में प्रताड़ित किया गया और वापस तुर्की के इस्तांबुल डिपोर्ट कर दिया गया। इन लगातार हो रही घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय खेल जगत को झकझोर कर रख दिया है। खेल विशेषज्ञों और वैश्विक समुदाय के बीच अमेरिका की इस आक्रामक इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर पहले से ही भारी आक्रोश और बहस छिड़ी हुई थी, जिसमें अब उरुग्वे का नाम भी जुड़ गया है।
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