US Fed Rate Cut
US Fed Rate Cut: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने बुधवार को अपनी प्रमुख ब्याज दर में लगातार तीसरी बार 0.25 प्रतिशत पॉइंट की कटौती की है। हालाँकि, इस कटौती के साथ ही फेड ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरें अपरिवर्तित (Unchanged) रह सकती हैं। दो दिवसीय लंबी बैठक के बाद यह फैसला लिया गया, जिससे अब ब्याज दर 3.5 प्रतिशत से घटकर 3.75 प्रतिशत के दायरे में आ गई है, जो पिछले लगभग तीन वर्षों में सबसे निचला स्तर है।
फेड रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि अब फेड आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था की सेहत का गहन मूल्यांकन करेगा और उसके बाद ही दरों में किसी और कटौती का फैसला लेगा। इसका सीधा मतलब है कि अब ब्याज दर में कटौती के सिलसिले पर अस्थायी विराम (Pause) लग सकता है। फेड अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि उन्हें अगले साल (2020) दरों में सिर्फ एक बार कमी किए जाने की उम्मीद है। इस सख्त रुख के कारण, इस फैसले को बाजार में ‘हॉकिश कट’ (Hawkish Cut) कहा जा रहा है, क्योंकि कटौती तो हुई, लेकिन भविष्य को लेकर फेड का रुख आक्रामक बना रहा।
फेड के इस फैसले की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आलोचना किए जाने की संभावना है। राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से ब्याज दरों में और अधिक कटौती की माँग कर रहे थे ताकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा मिल सके। पॉवेल ने संकेत दिया है कि फेड तब तक दरों में कटौती से परहेज कर सकता है जब तक कि अर्थव्यवस्था की सेहत का ठीक से आकलन नहीं हो जाता।
इस बार के फैसले की एक सबसे खास बात यह रही कि तीन फेड अधिकारियों ने दर कटौती के इस प्रस्ताव के खिलाफ वोटिंग की, जो पिछले लगभग छह सालों में विरोध के वोटों की सबसे बड़ी संख्या है। यह फेड के अंदर बढ़ते आपसी मतभेद को साफ दर्शाता है।दो अधिकारियों ने दरों में कोई बदलाव न किए जाने के पक्ष में वोट किया।फेड गवर्नर स्टीफन मिरान (जिन्हें ट्रंप ने नियुक्त किया था) ने आधे पॉइंट की कटौती के लिए वोट दिया।
पॉवेल ने कहा कि आने वाले समय में फेड अधिकारी अर्थव्यवस्था के विकास पर केंद्रित रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि फेड की प्रमुख ब्याज दर अब एक ऐसे स्तर के करीब है, जो न तो अर्थव्यवस्था को प्रतिबंधित करती है और न ही उसे जरूरत से ज्यादा प्रोत्साहित करती है।
अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा दर में कटौती के बावजूद अपनाए गए सख्त रुख का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।
सकारात्मक असर: इस कटौती से रेट सेंसिटिव स्टॉक्स जैसे आईटी कंपनियों के शेयर, एफएमसीजी, तेल कंपनियों और फाइनेंशियल स्टॉक्स को बढ़ावा मिल सकता है।
नकारात्मक असर: ब्याज दर में कटौती के बावजूद फेड रिजर्व का यह ‘हॉकिश’ (सख्त) रूख रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) के फ्लो को प्रभावित कर सकता है। यदि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनी रहती हैं, तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपना निवेश कम कर सकते हैं, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का क्रम बना रह सकता है।
हालाँकि, भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ और नियंत्रित महंगाई दर जैसे सकारात्मक घरेलू कारक इस बाहरी दबाव को कुछ हद तक संभालने में मददगार साबित हो सकते हैं। यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी एक संकेत है कि उसे वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अपनी मौद्रिक नीति में सतर्कता का रुख बनाए रखना चाहिए और कटौती को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
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