US Iran Deal 2026 : पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बना अमेरिका और ईरान का भीषण युद्ध आखिरकार थम गया है। लगभग 107 दिनों तक चले खूनी संघर्ष और सैन्य गतिरोध के बाद, दोनों महाशक्तियों ने आधिकारिक रूप से युद्ध समाप्त करने और एक व्यापक शांति समझौते (US-Iran Peace Deal) पर पूरी तरह सहमति जता दी है। दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयानों में कहा गया है कि शांति समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा चुका है और आगामी शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड की धरती पर इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर दोनों पक्षों द्वारा आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे।

वैश्विक कूटनीति के जानकार इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में स्थिरता और शांति बहाली की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में कई महीनों से बना युद्ध का साया और दोनों देशों के बीच का चरम तनाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

ईरानी मीडिया का बड़ा दावा: सामने आई 14 सूत्रीय समझौते की मुख्य बातें
यद्यपि दोनों देशों की सरकारों ने अभी तक इस समझौते की सभी आधिकारिक शर्तों और गुप्त नियमों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन ईरान के सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने इस ऐतिहासिक समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) से जुड़ी कई अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली बातें दुनिया के सामने रखी हैं। ईरान की प्रतिष्ठित ‘मेहर न्यूज एजेंसी’ की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच कुल 14 बिंदुओं वाले एक विस्तृत समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग, MoU) पर सहमति बनी है। इस गोपनीय मसौदे में शामिल प्रमुख शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि इसमें ईरान को कई बड़ी रियायतें मिलती दिख रही हैं।
समझौते के मुख्य बिंदु और सैन्य वापसी की शर्तें
ईरानी मीडिया द्वारा लीक किए गए मसौदे के अनुसार, इस ऐतिहासिक शांति समझौते में निम्नलिखित प्रमुख और कड़े बिंदुओं को शामिल किया गया है:
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लेबनान सहित क्षेत्र के सभी सक्रिय मोर्चों पर तुरंत प्रभाव से एक स्थायी और पूर्ण युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया जाएगा।
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अमेरिका ने लिखित रूप से यह वादा किया है कि वह भविष्य में कभी भी ईरान के आंतरिक और संप्रभु मामलों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक या सैन्य हस्तक्षेप नहीं करेगा।
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अगले 30 दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अमेरिकी नौसेना की पूरी नाकेबंदी हटा ली जाएगी।
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अमेरिकी प्रशासन अपनी तमाम सेनाओं और सैन्य साजो-सामान को ईरान की सीमाओं और प्रभावित क्षेत्रों से पूरी तरह वापस बुलाएगा।
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अगले एक महीने (30 दिन) के भीतर “ईरानी व्यवस्था और प्रबंधन” के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए दोबारा पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
मुआवजे का फंड, पाबंदियों का खात्मा और परमाणु कार्यक्रम पर फैसला
समझौते के आर्थिक और तकनीकी पहलुओं की बात करें तो अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी देश युद्ध से तबाह हुए ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक विशाल निवेश और विकास योजना पेश करेंगे। इसके साथ ही, वैश्विक बाजार में ईरानी तेल, गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर बरसों से लगे सभी कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। बदले में, ईरान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने दोबारा यह अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा कि वह अपनी परमाणु सुविधाओं का उपयोग केवल शांतिपूर्ण कार्यों के लिए करेगा और कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) विकसित नहीं करेगा। इसके अतिरिक्त, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को और ज्यादा नहीं बढ़ाने तथा ईरान पर भविष्य में कोई भी नया प्रतिबंध न लगाने का वादा करेगा।
अरबों डॉलर के फ्रोजन फंड्स की बहाली और संयुक्त राष्ट्र की मुहर
मेहर न्यूज एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक शर्त का भी खुलासा किया है। इसके अनुसार, आगामी शुक्रवार को होने वाली अंतिम दौर की आधिकारिक बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक कि विदेशी बैंकों में जब्त की गई ईरान की संपत्ति (फ्रोजन फंड्स) का कम से कम आधा हिस्सा, यानी 12 बिलियन डॉलर तुरंत जारी नहीं कर दिया जाता। साथ ही ईरानी तेल पर से पूरी तरह प्रतिबंध हटाना और नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करना इस बातचीत की पहली शर्त होगी। इस पूरी वैश्विक शांति प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध और स्थायी बनाने के लिए, अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक विशेष प्रस्ताव के जरिए पारित कर आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी।
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