US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया घटनाओं में अमेरिका ने ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में तेहरान, सेमनान, हमदान और होरमोज़गान जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांतों को निशाना बनाया गया है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के अनुसार, बंदर अब्बास के पास पुलों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई और कई नागरिक घायल हुए हैं। अमेरिकी कार्रवाई का दायरा अब तेहरान के करीब तक फैल गया है, जो इस युद्ध के और अधिक व्यापक होने का संकेत है।

सामरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर अमेरिका का प्रहार
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ग्रेटर तुंब द्वीप पर स्थित ईरान के रक्षा और मिसाइल ठिकानों को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया है। वर्ष 1971 से ईरान के नियंत्रण में रहे ये द्वीप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की रणनीतिक बढ़त का आधार हैं। हमलों के दौरान, अमेरिकी सेना ने एक तेल टैंकर को भी निष्क्रिय कर दिया, जिस पर नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने का आरोप था। इसके अलावा, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन केंद्र, सेमनान प्रांत को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्र में अमेरिकी दबदबा बनाए रखना है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई: बहरीन, कुवैत और जॉर्डन बने लक्ष्य
ईरान ने इन अमेरिकी हमलों का जवाब बहरीन, कुवैत और जॉर्डन की ओर मिसाइल और ड्रोन दागकर दिया है। हालांकि इन देशों की सरकारों ने हमलों की पुष्टि की है, लेकिन अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है। इस जवाबी कार्रवाई को क्षेत्रीय तनाव में एक बड़ी वृद्धि माना जा रहा है, क्योंकि इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान की ओर से यह स्पष्ट संकेत है कि यदि अमेरिका उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद नहीं करेगा, तो संघर्ष का दायरा पूरे मध्य पूर्व में फैल सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के लिए आर-पार की जंग
यह संघर्ष मूलतः ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के नियंत्रण को लेकर है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। पिछले महीने हुआ अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। ईरानी सेना के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फाघारी ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाहरी देशों का हस्तक्षेप ईरान के लिए ‘लाल रेखा’ है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि शांति की संभावना अभी भी मौजूद है, लेकिन साथ ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी को और अधिक सख्त कर दिया है।
वैश्विक तेल बाजार और व्यापारिक जहाजों पर गहराता संकट
इस सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। समुद्री डेटा कंपनी ‘लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस’ के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। बढ़ते खतरों के कारण कई तेल टैंकरों ने सुरक्षा की दृष्टि से अपने लोकेशन इक्विपमेंट बंद कर दिए हैं, जबकि कई अन्य जहाज समुद्र में ही लंगर डाले खड़े हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव लंबा खिंचता है, तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम दुनिया भर में ऊर्जा संकट के रूप में सामने आ सकते हैं।
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