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World War Alert: ट्रंप के ‘टैरिफ वार’ से भड़का चीन, ईरान संकट के बीच वैश्विक आर्थिक तबाही का बढ़ा खतरा, जानें बड़ी बातें!

World War Alert:  ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य तनाव ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। इस विवाद में चीन की प्रत्यक्ष एंट्री ने वैश्विक भू-राजनीति में खलबली मचा दी है। चीन ने पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी को लेकर अमेरिका को अत्यंत सख्त लहजे में चेतावनी दी है। चीन के रक्षा मंत्री डॉन्ग जुन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “अमेरिका की दादागीरी” किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चीन का मानना है कि यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवनरेखा है और इसे खुला रखना अनिवार्य है। चीन ने चेतावनी दी है कि यदि इस रणनीतिक मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न की गई, तो वह अपनी संप्रभुता और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए “उचित और कड़े” सैन्य कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

ट्रंप की 50 प्रतिशत टैरिफ की धमकी और चीन की अडिग प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चीन को घेरते हुए कहा था कि यदि बीजिंग ने ईरान को हथियारों की आपूर्ति की, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। ट्रंप ने एक बड़ा आर्थिक प्रहार करते हुए धमकी दी कि ऐसी स्थिति में अमेरिका, चीन से आयात होने वाले सभी सामानों पर तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत टैरिफ (आयात शुल्क) लगा देगा। इस भारी-भरकम आर्थिक दबाव के बावजूद चीन ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस रवैये को “गैर-जिम्मेदाराना” करार देते हुए कहा है कि ऐसी धमकियों से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है और चीन अपने स्वतंत्र व्यापारिक निर्णयों से समझौता नहीं करेगा।

प्रधानमंत्री ली कियांग का आदेश: ‘जैसा सवाल, वैसा जवाब’

अमेरिकी धमकियों के जवाब में चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने एक नया प्रशासनिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत, यदि कोई भी देश चीन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन या एकतरफा प्रतिबंध लगाता है, तो चीन भी समान रूप से कड़े जवाबी कदम उठाएगा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी एक सार्वजनिक मंच से बिना किसी देश का नाम लिए स्पष्ट किया कि चीन अब वह देश नहीं है जिसे डराकर दबाया जा सके। उन्होंने संकेत दिया कि चीन की विदेश नीति अब “शक्ति के विरुद्ध शक्ति” के सिद्धांत पर आधारित होगी, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।

यूएई को दो-टूक संदेश: कूटनीतिक संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं

चीन ने न केवल अमेरिका, बल्कि अपने मित्र देशों को भी अपनी विदेश नीति की लक्ष्मण रेखा स्पष्ट कर दी है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के क्राउन प्रिंस की यात्रा के दौरान, जब उन्होंने ईरान के साथ चीन के बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई, तो राष्ट्रपति जिनपिंग ने उन्हें कड़ा जवाब दिया। जिनपिंग ने साफ लहजे में कहा कि यूएई चीन का एक महत्वपूर्ण मित्र है, लेकिन वह यह तय नहीं कर सकता कि चीन को अन्य देशों के साथ किस तरह के कूटनीतिक संबंध रखने चाहिए। यह बयान दर्शाता है कि चीन मिडिल ईस्ट में अपनी रणनीतिक स्थिति को लेकर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पसंद नहीं कर रहा है।

मध्य पूर्व में चीन का आर्थिक हित: तेल और ऊर्जा की सुरक्षा

चीन की इस आक्रामकता के पीछे ठोस आर्थिक कारण हैं। अरब देशों के साथ चीन का वार्षिक व्यापार लगभग 400 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अपनी विशाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन सऊदी अरब, ईरान और यूएई से होने वाली तेल आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर है। इसके अतिरिक्त, कतर से होने वाली एलएनजी (LNG) की सप्लाई भी चीन के लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। यही कारण है कि चीन मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका से टकराने को भी तैयार है। यदि यह कूटनीतिक संघर्ष और गहराता है, तो पूरी दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की चपेट में आ सकती है।

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