US-Iran Talks: वैश्विक राजनीति के पटल पर एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस समय दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों में से एक की मेजबानी कर रही है। अमेरिका और ईरान के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल युद्धविराम और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए आज एक साथ बैठ रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और पूरी दुनिया की नजरें इस वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं। इस्लामाबाद के इस सुरक्षित जोन में हो रही बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे गतिरोध को कम करना और एक स्थिर समाधान की ओर कदम बढ़ाना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को लेकर अपना रुख बेहद कड़ा और स्पष्ट रखा है। वाशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि यदि यह बातचीत विफल हो जाती है और ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को बंद करने की धमकी देता है, तो अमेरिका की ‘प्लान-बी’ या वैकल्पिक योजना क्या होगी? इस पर ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया कि उन्हें किसी बैकअप प्लान की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सेना को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है और उनकी मिसाइल उत्पादन क्षमता अब नगण्य है। उन्होंने अमेरिकी सेना की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सक्षम हैं।
वार्ता की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्वयं इस्लामाबाद पहुंचे हैं। पेरिस से रवाना होते समय उन्होंने तेहरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि वे अमेरिका के धैर्य की परीक्षा न लें। वेंस ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने किसी भी तरह की चालाकी दिखाने की कोशिश की, तो वार्ता की मेज पर मौजूद अमेरिकी दल का रुख बेहद सख्त हो जाएगा। दूसरी ओर, ईरान का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ कर रहे हैं, जिनके साथ विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची भी शामिल हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने ईरानी दल का स्वागत किया, जो इस क्षेत्र में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को भी रेखांकित करता है।
भले ही दोनों पक्ष मेज पर हों, लेकिन उनके बीच की शर्तें एक बड़े अंतराल को दर्शाती हैं। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सामने 15 सूत्री मांगें रखी हैं। इसमें सबसे प्रमुख शर्त ईरान द्वारा अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह छोड़ना और अपनी सैन्य शक्ति व मिसाइल कार्यक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को स्वीकार करना है। इसके विपरीत, ईरान ने अपना 10 सूत्री जवाबी प्रस्ताव भेजा है। ईरान की मांगों में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से हुए आर्थिक नुकसान के लिए भारी हर्जाने की मांग और होर्मुज जलडमरूमध्य पर तेहरान की पूर्ण संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है। इन विपरीत ध्रुवों के बीच किसी समझौते पर पहुंचना कूटनीति की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो यह न केवल अमेरिका और ईरान के लिए बल्कि पूरे वैश्विक तेल बाजार और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल की आपूर्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है। हालांकि, ट्रंप की ‘कोई वैकल्पिक योजना नहीं’ वाली टिप्पणी यह संकेत देती है कि अमेरिका इस बार किसी भी तरह के समझौते के लिए अपनी शर्तों से पीछे हटने के मूड में नहीं है। अब गेंद ईरान के पाले में है कि वह कूटनीतिक रियायतों को चुनता है या सैन्य और आर्थिक दबाव के दौर को जारी रखता है।
Vivo T5 Pro 5G: स्मार्टफोन जगत में दिग्गज चीनी कंपनी वीवो ने अपना नया धमाका…
Bhupesh Baghel: छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया…
Maharashtra News : महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग अब एक नए शिखर पर पहुँच…
LPG Online Booking : अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव का वैश्विक असर अब…
Anandalok Hospital Fire: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक डरा देने वाली खबर सामने…
Gujarat ATS Action : गुजरात के आतंकवाद-विरोधी दस्ते (ATS) ने देश की सुरक्षा को लेकर…
This website uses cookies.