US Iran Peace Deal : अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद अब एक बड़े शांति समझौते पर सहमति बनने की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, 19 जून को जिनेवा में इस समझौते पर औपचारिक रूप से मुहर लग सकती है। हालांकि, अब तक इस समझौते की आधिकारिक शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस डील को लेकर गहरी उत्सुकता बनी हुई है। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस कथित समझौते में दोनों देशों को क्या हासिल हुआ है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।

अल-अरबिया की रिपोर्ट में 14 बिंदुओं का दावा
सऊदी अरब के प्रमुख मीडिया आउटलेट अल-अरबिया ने इस समझौते के कथित 14 बिंदुओं को उजागर करने का दावा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ये शर्तें सही साबित होती हैं, तो यह हाल के वर्षों में ईरान के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। दशकों से प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे ईरान के लिए यह डील एक बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।

युद्ध समाप्ति और तनाव खत्म करने का वादा
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश और उनके सहयोगी पक्ष इस समझौते पर हस्ताक्षर होते ही सभी मोर्चों पर युद्ध की स्थिति को समाप्त घोषित करेंगे। इसमें लेबनान जैसे क्षेत्र भी शामिल होंगे। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार की धमकी या बल प्रयोग नहीं करने पर सहमत होंगे। यह भी प्रस्तावित है कि अंतिम समझौते में इन सभी बिंदुओं की पुष्टि की जाएगी ताकि स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सके।
संप्रभुता और हस्तक्षेप से दूरी का समझौता
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे। दोनों देश यह भी वादा करेंगे कि वे एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसके साथ ही 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते को तैयार करने की समयसीमा भी तय की गई है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।
समुद्री व्यापार और नाकेबंदी खत्म करने की योजना
समझौते के लागू होते ही अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाई गई समुद्री नाकेबंदी समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले के स्तर पर बहाल करने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकतम 30 दिनों के भीतर व्यापारिक मार्गों को पूरी तरह खोलने की योजना है। साथ ही, अमेरिका अपने सैन्य बलों को भी संबंधित क्षेत्रों से हटाने पर सहमत हो सकता है।
ईरान की समुद्री गतिविधियों पर बदलाव
ईरान को भी समुद्री व्यापार से जुड़े अपने ढांचे में सुधार करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान को फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए तकनीकी बाधाओं को हटाने और समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) को निष्क्रिय करने जैसे कदम उठाने होंगे, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार सामान्य स्थिति में लौट सके।
300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड का प्रस्ताव
रिपोर्ट में सबसे अहम बिंदुओं में से एक ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का प्रस्ताव है। अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार मिलकर इस योजना को लागू करने पर काम करेंगे। इस फंड का उपयोग ईरान के बुनियादी ढांचे, उद्योग और अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए किया जाएगा। अंतिम समझौते के 60 दिनों के भीतर इस योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा तय की जा सकती है।
प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत देने की योजना
अमेरिका ने संकेत दिया है कि अंतिम समझौते के तहत ईरान पर लगे सभी प्रकार के प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जाएंगे। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से जुड़े प्रतिबंध और अमेरिकी प्रतिबंध शामिल हैं। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।
परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें
ईरान ने दोहराया है कि वह किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते के अनुसार, एनरिच्ड यूरेनियम और अन्य परमाणु गतिविधियों से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान अंतिम समझौते में किया जाएगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि ईरान की परमाणु जरूरतों और सीमाओं को स्पष्ट रूप से तय किया जाएगा।
आर्थिक गतिविधियों पर अस्थायी छूट
समझौते के लागू होने तक अमेरिका ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल और अन्य निर्यात उत्पादों पर कुछ आर्थिक छूट देने की बात कर रहा है। इसमें बैंकिंग, बीमा और परिवहन सेवाओं में राहत भी शामिल हो सकती है। इसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाना है।
फ्रीज संपत्तियों को जारी करने का प्रावधान
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करेगा। यह धन ईरान के केंद्रीय बैंक के माध्यम से उपयोग किया जा सकेगा। इसके लिए आवश्यक परमिट और लाइसेंस भी जारी किए जाएंगे ताकि वित्तीय लेनदेन सुचारू रूप से हो सके।
निगरानी और लागू करने की विशेष व्यवस्था
समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। यह प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि दोनों पक्ष अपने वादों का पालन करें और समझौता प्रभावी बना रहे। अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के माध्यम से कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में मंजूरी दी जा सकती है।
अमेरिकी सरकार में राजनीतिक विवाद और स्पष्टीकरण
इस कथित डील में 300 अरब डॉलर की सहायता के दावे के बाद अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रिपोर्ट को गलत बताया है, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को सीधे पैसा नहीं दे रहा, बल्कि प्रतिबंधों में ढील के जरिए निवेश का रास्ता खोलने की बात कर रहा है, जिससे अन्य देश ईरान के पुनर्निर्माण में भाग ले सकें। इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
Read More : ARG vs ALG Highlights: मेसी की हैट्रिक से अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को रौंदा, मैदान पर दागे दनादन गोल











