बृजमोहन अग्रवाल और वरिष्ठ अधिकारी अमित कटारिया के बीच हुए विवाद पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सांसद का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से सम्मानपूर्वक बात करनी चाहिए और उसी अनुरूप जवाब भी देना चाहिए।
बृजमोहन अग्रवाल और वरिष्ठ अधिकारी अमित कटारिया के बीच हुए विवाद पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सांसद का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से सम्मानपूर्वक बात करनी चाहिए और उसी अनुरूप जवाब भी देना चाहिए।

CG Politics: छत्तीसगढ़ में सांसद बृजमोहन अग्रवाल और आईएएस अधिकारी अमित कटारिया के बीच हुए विवाद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मामले पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सम्मान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का विशेष स्थान होता है और प्रशासनिक अधिकारियों का दायित्व है कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। उनके अनुसार अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की बात ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए और परिस्थितियों के अनुरूप उचित प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

मीडिया से बातचीत के दौरान अरुण साव ने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं और समस्याओं को लेकर उनके पास आते हैं। ऐसे में संवाद सम्मानजनक होना चाहिए और प्रशासनिक स्तर पर उनकी बातों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा तीन वर्ष से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों के तबादले संबंधी निर्देशों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर विभाग पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। यदि किसी विशेष मामले में शिकायत प्राप्त होती है तो सरकार उसका संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगी। उनके अनुसार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे कदम उठाना जरूरी होता है।
तबादलों को लेकर कांग्रेस की ओर से की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुण साव ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तबादलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे, उसे इस विषय पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण किए जाते हैं। इससे कार्यप्रणाली में सुधार आता है, प्रशासनिक कसावट बढ़ती है और विकास कार्यों को गति मिलती है।
नगर निकायों के लिए राशि जारी होने के बावजूद कुछ स्थानों पर विकास कार्यों में देरी के सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि जिन योजनाओं में विलंब हो रहा है, उनके कारणों की समीक्षा की जा रही है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाधाओं की पहचान कर जल्द समाधान निकालें, ताकि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी न हो और जनता को समय पर सुविधाएं मिल सकें।

पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ लगे ‘गो बैक’ नारों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी कांग्रेस के भीतर मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता आपसी विवादों में ही व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद अब विभिन्न राज्यों में भी दिखाई देने लगे हैं।
अपनी पूरी प्रतिक्रिया के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पारदर्शिता और सम्मान के साथ करें, तो प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकती है और विकास कार्यों को भी अपेक्षित गति मिल सकती है।
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