US-Iran Peace Talks
US-Iran Peace Talks: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद वैश्विक कूटनीति का अखाड़ा बनी हुई है। यहाँ अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता (Peace Talks) शुरू होने जा रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं, लेकिन बातचीत की मेज पर बैठने से पहले ही ईरान ने अपने कड़े और भावनात्मक तेवरों से पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
इस्लामाबाद की यात्रा के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने एक ऐसा संकेत दिया है जिसने इस वार्ता की गंभीरता को कई गुना बढ़ा दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष बाघर गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक मर्मस्पर्शी तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में विमान की खाली सीटों पर उन स्कूली बच्चियों की तस्वीरें चिपकी हुई थीं, जो ईरान के मीनाब में हुए हमले में मारी गई थीं। गालिबफ ने इन तस्वीरों के सामने खड़े होकर लिखा, “इस फ्लाइट में ये मेरी सहयात्री हैं।” इस प्रतीकात्मक कदम के जरिए ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों के खून और हुए नुकसान पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी यात्रा तब तक शुरू नहीं की, जब तक उसे इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर (संघर्ष विराम) के धरातल पर उतरने का भरोसा नहीं मिल गया। अपने डेलीगेशन का नाम ‘मीनाब 168’ रखकर ईरान ने उन 168 मासूमों को श्रद्धांजलि दी है जिन्होंने युद्ध की आग में अपनी जान गंवाई। सूत्रों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल पर हिजबुल्लाह के खिलाफ हमलों को रोकने के लिए भारी दबाव बनाया है, ताकि मंगलवार को होने वाली विस्तृत चर्चा के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार किया जा सके।
इस बार ईरानी दल में सबसे अधिक चर्चा ‘बाघेर जोल्गाद्र’ की हो रही है। जोल्गाद्र ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव हैं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सबसे कट्टरपंथी नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी मौजूदगी यह साफ संकेत देती है कि अब ईरान का सैन्य नेतृत्व सीधे तौर पर कूटनीतिक वार्ताओं में शामिल हो रहा है। इससे पहले की बैठकों में IRGC पर्दे के पीछे रहती थी, लेकिन अब सैन्य नेतृत्व की सीधी भागीदारी यह बताती है कि ईरान अपनी सुरक्षा चिंताओं पर कोई भी ढील नहीं देगा।
अमेरिका और लेबनान ने इजरायल से बार-बार अपील की है कि वह वार्ता सफल बनाने के लिए फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोक दे। हालांकि, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अब तक इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई थी। ट्रंप प्रशासन की कोशिश है कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच गोलाबारी बंद हो, जिससे इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए रास्ता साफ हो सके। ईरान के प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची और गालिबफ जैसे दिग्गजों का होना इस बात का प्रमाण है कि ईरान इस बैठक को निर्णायक मान रहा है।
इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु यह होगा कि क्या दोनों पक्ष अपनी पुरानी रंजिशों को भुलाकर किसी ठोस समझौते पर पहुँच पाते हैं। ईरान के वर्तमान रुख से लग रहा है कि वह अपनी शर्तों पर अड़ा रहेगा। वह न केवल प्रतिबंधों में ढील चाहता है, बल्कि अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की पूर्ण गारंटी भी चाहता है। गालिबफ द्वारा साझा की गई तस्वीरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के लिए यह केवल राजनीतिक वार्ता नहीं, बल्कि एक भावनात्मक लड़ाई भी है।
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