US-Iran Talks
US-Iran Talks: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की परोक्ष बातचीत फिर से शुरू होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण वार्ता की मेजबानी और मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंच गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर और गृहमंत्री मोहसिन नकवी ईरानी नेताओं का स्वागत करते नजर आ रहे हैं। उम्मीद है कि अराघची अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा करेंगे।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ एक ही मेज पर बैठकर सीधी बातचीत नहीं करेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि इस वार्ता का उद्देश्य उस ‘थोपे गए युद्ध’ को समाप्त करना है जिसका सामना तेहरान कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि ईरान का कोई भी प्रस्ताव या संदेश पाकिस्तान के माध्यम से ही अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जाएगा। ईरान की ओर से यह रुख दर्शाता है कि वह अपनी संप्रभुता और कूटनीतिक गरिमा के साथ कोई समझौता किए बिना समाधान चाहता है।
अमेरिकी पक्ष भी इस राजनयिक संपर्क को लेकर पूरी तरह तैयार है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल नहीं हैं। वे वाशिंगटन से ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ समन्वय स्थापित कर बातचीत की निगरानी करेंगे। अमेरिका ने पुष्टि की है कि वार्ता प्रत्यक्ष होगी, लेकिन इसमें पाकिस्तान की भूमिका एक सेतु (Bridge) के रूप में अनिवार्य रहेगी।
पाकिस्तान में बातचीत शुरू होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिका की मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक उन्हें इस प्रस्ताव के बारीकियों (Details) की जानकारी नहीं मिली है। ट्रंप का मानना है कि ईरान पर बढ़ते दबाव का असर दिख रहा है और वे अब बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “हमें देखना होगा कि वे क्या पेशकश करते हैं।”
ट्रंप ने अपनी शर्तों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए ईरान को अपना ‘समृद्ध यूरेनियम’ (Enriched Uranium) पूरी तरह छोड़ना होगा। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से तेल के जहाजों की आवाजाही को निर्बाध सुनिश्चित करना होगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि वे तेहरान में किससे बात कर रहे हैं, तो उन्होंने नाम लेने से बचते हुए कहा कि “हम वर्तमान में सत्ता में मौजूद लोगों के साथ संपर्क में हैं।”
ईरान में नेतृत्व के बीच आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच अमेरिका बहुत सावधानी से कदम उठा रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वे ईरान के प्रस्ताव की गहन समीक्षा करेंगे और उसके बाद ही आर्थिक प्रतिबंधों या सैन्य नाकाबंदी को हटाने पर विचार किया जाएगा। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही यह चर्चा न केवल इन दो देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वैश्विक तेल बाजार और परमाणु सुरक्षा की दिशा तय होगी।
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