US-Iran War: ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का आंकड़ा बढ़कर 774 तक पहुंच गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 756 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि 18 सैनिकों की मौत हुई है। पेंटागन ने इस सप्ताह अपने युद्ध हताहत डेटाबेस को अपडेट करते हुए 50 और घायल सैनिकों के नाम आंकड़ों में शामिल किए हैं।
पेंटागन के डेटाबेस में जोड़े गए 50 नए घायल सैनिक
डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम यानी DCAS के आंकड़ों के अनुसार, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और ‘ओवरसीज ऑपरेशन्स’ श्रेणी के आंकड़ों को मिलाने पर घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या 756 हो जाती है। वहीं, इस सैन्य अभियान में अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है। इस तरह मृतकों और घायलों को मिलाकर अमेरिकी सैन्य हताहतों की कुल संख्या 774 हो गई है।
जुलाई से अलग दर्ज किए जा रहे युद्ध के हताहत आंकड़े
अमेरिकी रक्षा विभाग ने पिछले महीने ईरान संघर्ष से जुड़े सैन्य हताहतों के लिए ‘ओवरसीज ऑपरेशन्स’ नाम से एक अलग सेक्शन बनाया था। यह अभियान 7 जुलाई से शुरू हुए संघर्ष से संबंधित है। इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के खिलाफ दोबारा हवाई हमले शुरू किए थे। अमेरिकी पक्ष ने इन हमलों को होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा कथित तौर पर शिपिंग टैंकरों को निशाना बनाए जाने की प्रतिक्रिया बताया था।
ट्रंप ने कांग्रेस को सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी
इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को क्षेत्र में दोबारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सेना और यूएस सेंट्रल कमांड को सैन्य अभियान जारी रखने के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिलहाल समाप्त होने के बजाय आगे भी जारी रह सकता है।
पहले भी हताहतों के आंकड़ों को लेकर उठे थे सवाल
पेंटागन द्वारा जारी ताजा आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इससे पहले अमेरिकी सैनिकों के घायल और मारे जाने की संख्या कथित तौर पर कम दिखाई गई थी। इसको लेकर रक्षा विभाग को मीडिया और डेमोक्रेटिक सांसदों की आलोचना का सामना करना पड़ा था। उस समय रक्षा विभाग ने सोशल मीडिया के जरिए सफाई देते हुए कहा था कि आंकड़ों में कमी एक अस्थायी डेटा संबंधी गड़बड़ी की वजह से हुई थी।
घायल सैनिकों की जानकारी देने में देरी का आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के साथ जारी संघर्ष के दौरान अमेरिकी रक्षा विभाग पर घायल सैनिकों की संख्या सार्वजनिक करने में देरी करने के आरोप भी लगे हैं। अधिकारियों ने इस देरी के पीछे सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिया था। अब नए आंकड़े सामने आने के बाद अमेरिकी सैन्य अभियान में हुए नुकसान का आंकड़ा पहले की तुलना में काफी अधिक स्पष्ट हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का मुख्य केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम रणनीतिक क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसी क्षेत्र को लेकर तनाव बढ़ने से ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। ईरान और ओमान के बीच इस जलमार्ग को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत भी फिलहाल आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही है।
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध का किया ऐलान
सैन्य कार्रवाई के साथ अमेरिका अब ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। ट्रंप ने इस सप्ताह घोषणा की कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अभियान शुरू करने जा रहा है। उन्होंने इसे अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव बताया। इसका उद्देश्य ईरान पर वित्तीय दबाव बढ़ाकर उसकी आर्थिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को सीमित करना माना जा रहा है।
ईरान संघर्ष में आगे क्या होगा, इस पर नजर
अमेरिकी सैनिकों के हताहतों के ताजा आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य तथा आर्थिक तनाव दोनों बढ़े हुए हैं। एक तरफ अमेरिका अपने सैन्य अभियान और आर्थिक प्रतिबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव किस दिशा में जाता है, इस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।
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