US Iran War Tension
US Iran War Tension: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक दरार अब सीधे सैन्य टकराव की ओर बढ़ती दिख रही है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य रुख अपनाने का संकेत दिया है। ट्रम्प ने रक्षा अधिकारियों से ऐसे विकल्पों की सूची मांगी है जिनका प्रभाव ‘निर्णायक’ हो। पेंटागन और व्हाइट हाउस इन योजनाओं पर युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। चर्चा यहाँ तक है कि इन विकल्पों में ईरानी शासन को सत्ता से बेदखल करने जैसी रणनीतियां भी शामिल हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व (Middle East) में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है।
समुद्री मोर्चे पर अमेरिका ने अपनी घेराबंदी तेज कर दी है। परमाणु ऊर्जा से संचालित जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन तेजी से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने पुष्टि की है कि यह विमानवाहक पोत अब अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पोत ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए ‘ऑटोमैटिक पहचान प्रणाली’ को बंद कर दिया है, जिससे यह आशंका प्रबल हो गई है कि अमेरिका किसी गुप्त या अचानक सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है।
USS अब्राहम लिंकन अकेला नहीं है; इसके साथ विध्वंसक (Destroyer) जहाजों और परमाणु पनडुब्बियों का एक पूरा बेड़ा चल रहा है। इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर लगभग 48 से 60 F/A-18 फाइटर जेट्स तैनात हैं। ये विमान एक बार उड़ान भरकर बिना ईंधन भरे 2300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं, जिससे ईरान के कई प्रमुख शहर सीधे हमले की जद में आ गए हैं। इसके अलावा, अमेरिका का C 37-B टोही विमान भी ईरान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान के बेस पर पहुँच चुका है, जो निगरानी को और पुख्ता कर रहा है।
जमीनी मोर्चे पर भी अमेरिका ने जॉर्डन के मफराक अल-खवाजा एयरबेस को अपना मुख्य केंद्र बनाया है। रॉयटर्स के अनुसार, यहाँ कम से कम 12 F-15 फाइटर जेट्स तैनात किए जा चुके हैं और कई अन्य रास्ते में हैं। अमेरिकी सैन्य ट्रांसपोर्ट विमानों (C-17) के जरिए यहाँ आधुनिक पैट्रियट-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पहुंचाए गए हैं। इस तैनाती का प्राथमिक उद्देश्य ईरान की किसी भी संभावित जवाबी कार्रवाई से इजराइल और इलाके में मौजूद अमेरिकी हितों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है।
अमेरिकी गतिविधियों के जवाब में ईरान ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरानी सुप्रीम काउंसिल के सदस्य जावेद अकबरी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिका के सभी सैन्य अड्डे ईरान की मिसाइलों की रेंज में हैं। ईरान की यह धमकी दर्शाती है कि यदि संघर्ष शुरू होता है, तो यह केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैल सकता है।
हिंद महासागर के रणनीतिक द्वीप डिएगो गार्सिया पर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी भारी हलचल देखी जा रही है। यहाँ लगातार कार्गो विमानों की लैंडिंग हो रही है, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका एक लंबे सैन्य ऑपरेशन के लिए जरूरी रसद, ईंधन और सैनिकों का स्टॉक जमा कर रहा है। पेंटागन अब मिडिल ईस्ट के अन्य ठिकानों पर भी अतिरिक्त एयर-डिफेंस सिस्टम लगाने पर विचार कर रहा है ताकि ईरानी मिसाइल हमलों को हवा में ही नाकाम किया जा सके।
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