US Midterm Elections 2026 : अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन चुनावों से तय होगा कि उनके कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों में कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहेगा या डेमोक्रेट्स सत्ता संतुलन बदलने में कामयाब होंगे। महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, आव्रजन नीति और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
चुनाव जीतने के लिए ट्रंप ने खर्च किए करोड़ों डॉलर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव प्रचार में राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक संगठनों ने भारी रकम खर्च की है। ट्रंप से जुड़े MAGA Inc. ने करीब 28 करोड़ डॉलर खर्च किए, जबकि टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने लगभग 36.6 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। इन खर्चों से चुनावी मुकाबले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

प्रतिनिधि सभा और सीनेट की 470 सीटों पर मुकाबला
इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान होना है। फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी हैं। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक रिपब्लिकन के पास 219, डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं और दो सीटें खाली हैं। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों का फायदा चाहिए।

सीनेट में भी बहुमत बचाने की चुनौती
सीनेट में रिपब्लिकन के पास 53, डेमोक्रेट्स के पास 45 और दो निर्दलीय सदस्यों के पास सीटें हैं, जो डेमोक्रेट्स के साथ मतदान करते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों का शुद्ध लाभ चाहिए। बराबरी की स्थिति में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का वोट निर्णायक हो सकता है।
महंगाई, आव्रजन और ईरान युद्ध बने चुनावी मुद्दे
मतदाताओं के सामने महंगाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें सबसे बड़े मुद्दों में शामिल हैं। इसके अलावा सीमा सुरक्षा, आव्रजन नीति, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और ईरान युद्ध को लेकर भी सरकार की आलोचना हो रही है। इन मुद्दों पर जनता की नाराजगी रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों पर भी टिकी निगाहें
इन चुनावों में भारतीय मूल के कई उम्मीदवार भी महत्वपूर्ण मुकाबलों में शामिल हैं। ओहायो में विवेक रामास्वामी गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। प्रतिनिधि सभा में रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम और अमी बेरा जैसे भारतीय मूल के नेता भी दोबारा चुनाव मैदान में हैं। न्यूयॉर्क में सरिथा कोमातिरेड्डी और लॉस एंजिलिस में नित्या रमन के चुनावी मुकाबलों पर भी नजर रहेगी।
भारतीय-अमेरिकी मतदाता बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली और न्यू जर्सी जैसे क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की अच्छी मौजूदगी है। करीबी मुकाबलों में उनके वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को पसंद किया।
मतदान के बाद शुरू होगी मतगणना
अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग के मुताबिक देश में करीब 23.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना शुरू होगी। चुनावी नतीजे अगले दिन तक सामने आने की संभावना है, हालांकि कुछ करीबी मुकाबलों में परिणाम आने में अधिक समय लग सकता है।
क्या ट्रंप के आखिरी दो सालों की राजनीति बदलेगी?
अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो वे ट्रंप सरकार के विधायी एजेंडे को रोकने और प्रशासन की जांच कराने में सक्षम होंगे। वहीं सीनेट में बहुमत का असर न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों पर पड़ेगा। हालांकि, किसी सदन में हारने से ट्रंप की राष्ट्रपति पद की शक्तियां समाप्त नहीं होंगी। इन चुनावों के नतीजे 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की रणनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।


