US military strike
US military strike: वॉशिंगटन से प्राप्त ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। शुक्रवार को अमेरिकी साउदर्न कमांड ने नार्को-ट्रैफिकिंग में संलिप्त एक संदिग्ध जहाज पर सीधा और घातक हमला किया। इस सैन्य कार्रवाई में जहाज पर सवार दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है। अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए बताया कि कोस्ट गार्ड को जीवित बचे व्यक्ति की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए गए हैं। यह हमला न केवल तस्करी रोकने के लिए था, बल्कि क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को दर्शाने वाला एक कड़ा संदेश भी माना जा रहा है।
यूएस साउदर्न कमांड द्वारा साझा किए गए वीडियो फुटेज में समुद्र के बीचों-बीच चल रहे एक जहाज को दिखाया गया है, जिस पर अचानक सटीक निशाना साधकर विस्फोट किया गया। धमाके के तुरंत बाद पूरा जहाज भीषण आग की लपटों में घिर गया और धुएं का गुबार आसमान छूने लगा। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस अभियान का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के साथ हुई थी। ट्रंप प्रशासन अब वेनेजुएला से जुड़े उन प्रतिबंधित तेल टैंकरों और जहाजों को निशाना बना रहा है, जिन पर ड्रग तस्करी के माध्यम से अवैध फंडिंग जुटाने का संदेह है। सितंबर से अब तक इस तरह के 36 हमले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें मरने वालों की संख्या 117 तक पहुँच गई है।
इस सैन्य तनाव की जड़ें 3 जनवरी को वेनेजुएला की राजधानी काराकस में चलाए गए एक गुप्त और विशाल ऑपरेशन में छिपी हैं। अमेरिकी विशेष बलों ने मादुरो और उनकी पत्नी को उनके आवास से पकड़कर सीधे न्यूयॉर्क पहुँचाया, जहाँ उन पर संघीय ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। गिरफ्तारी से पहले मादुरो ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा किया था कि अमेरिका ड्रग्स के बहाने उनकी सरकार को गिराने की साजिश रच रहा है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद से ही कैरेबियन और प्रशांत महासागर में अमेरिकी सेना ने “ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर” के तहत गश्त और हमले तेज कर दिए हैं, जिससे लैटिन अमेरिकी देशों में तनाव का माहौल बना हुआ है।
कैरेबियन सागर वर्तमान में अमेरिकी सैन्य अभियानों का केंद्र बन चुका है। दिसंबर के अंत में भी सेना ने दो दिनों के भीतर पांच ड्रग-स्मगलिंग नावों को नष्ट किया था, जिसमें आठ तस्कर मारे गए थे। अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नौसेना लगातार इन समुद्री रास्तों की निगरानी कर रहे हैं। इन हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों और कई देशों द्वारा आलोचना भी की जा रही है, क्योंकि इनमें हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग का तर्क है कि बिना बल प्रयोग के इन अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स को तोड़ना संभव नहीं है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान अपनी नीतियों का बचाव करते हुए एक बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने कहा, “हमारे कड़े सैन्य कदमों के कारण हमने समुद्री मार्ग से आने वाली लगभग 100 प्रतिशत ड्रग्स को रोक दिया है।” ट्रंप प्रशासन का मानना है कि नार्को-आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए मादुरो जैसे नेताओं पर कार्रवाई और संदिग्ध जहाजों को समुद्र में ही नष्ट करना अनिवार्य है। यह नवीनतम हमला न केवल तस्करी के खिलाफ लड़ाई है, बल्कि ट्रंप की उस ‘वेनेजुएला नीति’ का प्रमाण है, जिसने दक्षिण अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
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