US National Debt
US National Debt: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद अमेरिका इस समय एक अभूतपूर्व वित्तीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज रिकॉर्ड 39 ट्रिलियन डॉलर के पार निकल गया है। यह आंकड़ा न केवल वैश्विक विशेषज्ञों को चौंका रहा है, बल्कि अमेरिकी प्रशासन के लिए भी सिरदर्द बन गया है। बुधवार को जारी आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमाम प्रयासों के बावजूद कर्ज की रफ्तार में कोई कमी नहीं आ रही है।
हाल ही में अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर जो सैन्य कार्रवाई की है, उसे अब 20 दिन पूरे हो चुके हैं। व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक अमेरिका 12 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है। युद्ध की अनिश्चितता और रक्षा खर्च में इस भारी बढ़ोतरी ने पहले से ही बोझ तले दबी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ा दिया है। सैन्य मोर्चे पर सक्रियता अमेरिका की वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में राष्ट्रीय कर्ज को कम करने का प्रमुख वादा किया था। सत्ता में आने के बाद ट्रंप प्रशासन ने बड़े टैक्स सुधार, इमिग्रेशन पर सख्ती और रक्षा बजट में वृद्धि जैसे कदम उठाए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन नीतियों का तात्कालिक परिणाम कर्ज में कमी के रूप में नहीं दिख रहा है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं से तुलना करें तो अमेरिका का यह कर्ज भारतीय जीडीपी से लगभग 10 गुना अधिक है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।
गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) ने चेतावनी दी है कि कर्ज बढ़ने के पीछे केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि कई घरेलू कारक भी जिम्मेदार हैं। मॉर्गेज और कार लोन पर बढ़ती ब्याज दरें आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही हैं। इसके अतिरिक्त, निवेश में कमी के कारण वेतन वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है, जबकि वस्तुओं और सेवाओं की महंगाई लगातार बनी हुई है। संतुलित बजट के समर्थकों का कहना है कि अगर ब्याज भुगतान का यह चक्र इसी तरह चलता रहा, तो भविष्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए ‘डिफ़ॉल्ट’ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के सीईओ माइकल पीटरसन ने इस स्थिति को भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय बताया है। उनका कहना है कि कर्ज की यह तेज रफ्तार युवाओं और आने वाले नागरिकों पर भारी वित्तीय बोझ डाल रही है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो चाहे रिपब्लिकन सत्ता में हों या डेमोक्रेट, दोनों ही दलों के कार्यकाल में कर्ज बढ़ा है। कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए भारी खर्च और बार-बार की टैक्स कटौती ने आग में घी डालने का काम किया है।
कुछ ही महीनों पहले अमेरिकी कर्ज 37 ट्रिलियन डॉलर था, जो तेजी से 38 और अब 39 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया है। जिस गति से यह बढ़ रहा है, अर्थशास्त्रियों को डर है कि यह जल्द ही 40 ट्रिलियन डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू लेगा। वित्तीय वर्ष 2025 में सरकार का कुल खर्च 7.01 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि राजस्व केवल 5.23 ट्रिलियन डॉलर था। यह 1.78 ट्रिलियन डॉलर का विशाल राजकोषीय घाटा दर्शाता है कि अमेरिका अपनी आय से कहीं अधिक खर्च कर रहा है।
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