US-Saudi Airstrike: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव अब अधिक खतरनाक चरण में पहुंच गया है। हाल के घटनाक्रमों ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच टकराव केवल सीमित जवाबी कार्रवाई तक नहीं रह गया है। इस बार संघर्ष में सऊदी अरब भी खुलकर अमेरिका के साथ सैन्य अभियानों में शामिल होता दिखाई दिया है। दोनों देशों ने इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। लगातार हो रही सैन्य गतिविधियों के कारण क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका एक बार फिर गहरा गई है।

जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइल हमला
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने जॉर्डन में स्थित मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। यह एयर बेस अमेरिकी सेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने दावा किया कि अधिकांश मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही इंटरसेप्ट कर लिया गया। इस हमले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई तथा अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले भी संयम बरत चुका है, लेकिन अब जवाब देने का समय आ गया है। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। उनके बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वाशिंगटन इस हमले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है और आगे की रणनीति अधिक आक्रामक हो सकती है।
मिस्र में ड्रोन हमले से बढ़ी चिंता
इसी बीच मिस्र के एक बंदरगाह पर खड़े दो प्राकृतिक गैस जहाजों में ड्रोन हमले के बाद आग लगने की खबर सामने आई। हालांकि इस घटना की जांच जारी है, लेकिन यदि इसमें ईरान या उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका की पुष्टि होती है तो यह संघर्ष के दायरे के और अधिक फैलने का संकेत होगा। मिस्र अब तक क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, इसलिए वहां इस तरह की घटना को गंभीर माना जा रहा है।
सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ की संयुक्त एयरस्ट्राइक
ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के हथियार भंडार और रसद केंद्रों पर संयुक्त हवाई कार्रवाई की। यह पहली बार माना जा रहा है जब सऊदी अरब ने इराक में इस प्रकार की प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई में खुलकर भाग लिया। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण में बड़ा बदलाव माना जा रहा है और इससे ईरान तथा सऊदी अरब के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।
इजरायल भी स्थिति पर रखे हुए है नजर
इसी दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इजरायली अधिकारियों को आशंका है कि अमेरिका आगामी घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए संघर्ष को सीमित रखने की कोशिश कर सकता है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल बाजार पर असर
क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग पर संकट और गहराता है तो दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
अमेरिकी रक्षा प्रणाली पर बढ़ा दबाव
लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अमेरिकी रक्षा तंत्र पर भी दबाव बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका को बड़ी संख्या में मिसाइल इंटरसेप्टर का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे उसकी रक्षा क्षमता से जुड़े संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो सैन्य संसाधनों का प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकता है।
पेंटागन ने जताई मिसाइल भंडार को लेकर चिंता
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पैट्रियट और THAAD जैसी उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों के इंटरसेप्टर लगातार इस्तेमाल होने के कारण उनके भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति ट्रंप को आगाह किया है कि यदि गोला-बारूद और इंटरसेप्टर का उपयोग इसी गति से होता रहा तो भविष्य के सैन्य अभियानों पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका के सामने सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ रक्षा संसाधनों के संतुलित उपयोग की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
Read More : Neymar Retires : नेमार ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को कहा अलविदा, ब्राज़ील करियर भावुक अंदाज़ में समाप्त किया












