Trump Cuba Strike
Trump Cuba Strike : दुनिया इस समय पहले से ही ईरान और इजरायल के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के कारण तनाव में है, लेकिन अब पश्चिमी गोलार्ध से एक और चौंकाने वाली खबर आ रही है। ईरान के बाद अब अमेरिका ने अपने पड़ोसी देश क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर ली है। अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को क्यूबा पर सैन्य हमला करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। इस फैसले ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिका के पिछवाड़े (Backyard) में एक नए युद्ध की शुरुआत का संकेत है।
सीनेट में इस मुद्दे पर जोरदार बहस और मतदान हुआ। विपक्ष (डेमोक्रेट्स) ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर लगाम लगाने और सैन्य हमले को रोकने के लिए एक विशेष प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि, मतदान के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप का पलड़ा भारी रहा। सीनेट ने 51-47 के बहुमत से विपक्ष के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे सैन्य हमले का रास्ता साफ हो गया। इस वोटिंग में अधिकांश रिपब्लिकन सीनेटरों ने एकजुट होकर राष्ट्रपति का समर्थन किया। दिलचस्प बात यह रही कि दो डेमोक्रेट सीनेटरों ने मतदान से अनुपस्थित रहकर अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप की रणनीति को सफल बनाने में मदद की।
रिपब्लिकन सीनेटरों ने इस सैन्य अनुमति को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए अनिवार्य कदम बताया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार रूस और चीन के साथ मिलकर गुप्त सैन्य सहयोग बढ़ा रही है, जो सीधे तौर पर अमेरिका के हितों के लिए घातक है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के अपने संबोधनों में क्यूबा को एक ‘क्षेत्रीय खतरा’ (Regional Threat) घोषित किया है। वहीं, डेमोक्रेट्स ने इसे एक जल्दबाजी में लिया गया फैसला और संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया है, उनका तर्क है कि बिना ठोस सबूतों के युद्ध में उतरना घातक हो सकता है।
अमेरिका और क्यूबा के बीच कड़वाहट का इतिहास कोई नया नहीं है, बल्कि यह 67 साल पुराना घाव है जो 2026 में फिर से हरा हो गया है। इस विवाद की जड़ें 1959 की क्यूबाई क्रांति में छिपी हैं, जब फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित बातिस्ता सरकार को उखाड़ फेंका और एक कम्युनिस्ट शासन की स्थापना की थी। जब कास्त्रो सरकार ने अमेरिकी स्वामित्व वाली चीनी मिलों और कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करना शुरू किया, तो 1960 में अमेरिका ने कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। तब से दोनों देशों के बीच संबंधों में कभी सुधार नहीं देखा गया।
शीत युद्ध के दौरान क्यूबा सोवियत संघ का सबसे करीबी सहयोगी बन गया था, जिसके कारण 1962 में प्रसिद्ध ‘क्यूबा मिसाइल संकट’ पैदा हुआ और दुनिया परमाणु युद्ध की कगार पर पहुंच गई थी। इसके बाद अमेरिका ने क्यूबा की पूर्ण आर्थिक और कूटनीतिक घेराबंदी कर दी थी। 1982 में अमेरिका ने क्यूबा को आधिकारिक तौर पर “आतंकवाद का प्रायोजक देश” घोषित किया था। अब 2026 में, रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के तर्क के साथ राष्ट्रपति ट्रंप उसी पुरानी दुश्मनी को एक पूर्ण सैन्य संघर्ष में बदलने की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे पूरे लैटिन अमेरिका में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है।
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