US Space Weapons : अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण के बीच अमेरिका ने एक बड़ा और अहम खुलासा किया है। अमेरिकी स्पेस फोर्स और वायु सेना सचिव ट्रॉय मींक ने पुष्टि की है कि अमेरिका ने पृथ्वी की कक्षा में हथियार तैनात किए हैं। यह स्वीकारोक्ति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान ने अंतरिक्ष में अपनी सक्रिय हथियार क्षमताओं को लेकर इतनी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक तौर पर नहीं दी थी।
चीन और रूस की चुनौती के बीच बढ़ी अंतरिक्ष में सैन्य तैयारी
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अंतरिक्ष में इन क्षमताओं की तैनाती के पीछे चीन और रूस से उत्पन्न रणनीतिक चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। अमेरिका का मानना है कि भविष्य के किसी बड़े संघर्ष में अंतरिक्ष आधारित सैटेलाइट, संचार, नेविगेशन और निगरानी प्रणालियां बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में इन संसाधनों की सुरक्षा को अमेरिकी सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।
ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल हथियारों की पुष्टि
पेंटागन में आयोजित एयर, स्पेस, साइबर कॉन्फ्रेंस के दौरान वायु सेना सचिव ट्रॉय मींक ने अंतरिक्ष में हथियारों की मौजूदगी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अमेरिका के पास अब ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स मौजूद हैं। इनका उद्देश्य अमेरिकी और सहयोगी सैन्य बलों को अंतरिक्ष में संभावित प्रतिकूल गतिविधियों और हमलों से सुरक्षित रखना है।
काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक दोनों तकनीकों का इस्तेमाल
स्पेस फोर्स से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी अंतरिक्ष क्षमताओं में काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक दोनों तरह की तकनीकें शामिल हैं। काइनेटिक प्रणालियां किसी लक्ष्य पर भौतिक प्रभाव डालने में सक्षम होती हैं, जबकि नॉन-काइनेटिक तकनीकों में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप, जैमिंग और अन्य उन्नत साधन शामिल हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इन क्षमताओं का इस्तेमाल रक्षात्मक और आक्रामक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
हथियारों की संख्या और लोकेशन अभी भी गोपनीय
अमेरिका ने अंतरिक्ष में मौजूद हथियारों को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। पेंटागन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन हथियारों के प्रकार, उनकी वास्तविक संख्या और पृथ्वी की कक्षा में उनकी सटीक लोकेशन बताने से इनकार किया है। इससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका अपनी अंतरिक्ष आधारित सैन्य क्षमता के महत्वपूर्ण हिस्से को फिलहाल रणनीतिक गोपनीयता में रखना चाहता है।
चीन तेजी से विकसित कर रहा काउंटर-स्पेस क्षमता
अमेरिकी स्पेस फोर्स चीन को अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रमुख रणनीतिक चुनौती के तौर पर देखती है। अमेरिका का आरोप है कि चीन अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण के तहत काउंटर-स्पेस और एंटी-सैटेलाइट तकनीकों को तेजी से विकसित कर रहा है। ऐसी तकनीकें किसी विरोधी देश के उपग्रहों को प्रभावित या निष्क्रिय करने की क्षमता रख सकती हैं।
रूस भी अंतरिक्ष को मानता है संभावित युद्ध क्षेत्र
रूस को भी अमेरिका अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता है। अमेरिकी आकलन के मुताबिक रूस अंतरिक्ष को संभावित युद्ध क्षेत्र के रूप में देखता है और भविष्य के सैन्य संघर्षों में अंतरिक्ष पर नियंत्रण को महत्वपूर्ण मानता है। इसी वजह से अमेरिका अपनी स्पेस फोर्स की क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है।
1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी में क्या है प्रावधान
अंतरिक्ष में सैन्य गतिविधियों की चर्चा के बीच 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह संधि अंतरिक्ष में सामूहिक विनाश के हथियारों, खासकर परमाणु हथियारों की तैनाती पर रोक लगाती है। हालांकि, पारंपरिक हथियारों और कई तरह की सैन्य अंतरिक्ष क्षमताओं पर इसी तरह का व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
अंतरिक्ष की सुरक्षा अब वैश्विक रणनीति का हिस्सा
अंतरिक्ष का सैन्य उपयोग कोई नई प्रक्रिया नहीं है। इसकी शुरुआत 1957 में सोवियत संघ के स्पुतनिक उपग्रह के प्रक्षेपण के दौर से मानी जाती है। आज अमेरिका, रूस, चीन और भारत समेत कई देश उपग्रह संचार, नेविगेशन, निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। अमेरिकी स्वीकारोक्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष वैश्विक सैन्य प्रतिस्पर्धा का कितना बड़ा केंद्र बनेगा।
Read More : Hanuman Ansh Box Office: 300 करोड़ के करीब फिल्म, 39वें दिन कमाई में आई गिरावट