Kharg Island US attack
Kharg Island US attack: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक विनाशकारी मोड़ ले लिया है। शनिवार सुबह भारतीय समयानुसार, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ‘खार्ग आइलैंड’ पर जोरदार हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे “मिडिल ईस्ट के इतिहास के सबसे भीषण बम धमाकों में से एक” करार दिया है। ट्रंप का दावा है कि इस हमले में खार्ग आइलैंड पर स्थित ईरान के लगभग सभी महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। खार्ग आइलैंड ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है, जिसे ईरान का ‘क्राउन’ भी कहा जाता है, और इस पर हमले का सीधा असर तेहरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता पर पड़ा है।
अमेरिका के इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करने में देर नहीं की। ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने घोषणा की है कि उन्होंने यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) में स्थित अमेरिका के तीन प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इतना ही नहीं, ईरान ने बहरीन और कुवैत में भी अमेरिकी सैन्य उपस्थिति पर मिसाइलें दागी हैं। ईरान के इस आक्रामक तेवर ने खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना और उनके सहयोगी देशों के लिए गंभीर सुरक्षा संकट पैदा कर दिया है। दोनों महाशक्तियों के बीच यह सीधा टकराव अब पूरे क्षेत्र को एक महायुद्ध की ओर धकेल रहा है।
युद्ध के मैदान के साथ-साथ ईरान अब आंतरिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठा रहा है। वेस्ट अजरबैजान पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने जानकारी दी है कि ईरान ने देश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र से 20 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि ये आरोपी ईरान के मिलिट्री बेस और सुरक्षा विभागों की अत्यंत गोपनीय जानकारी इजरायल की खुफिया एजेंसी को ‘स्मगल’ कर रहे थे। दावा किया जा रहा है कि इन्हीं सूचनाओं के आधार पर इजरायल ईरान के डिफेंस चेकपॉइंट्स पर सटीक हमले कर पा रहा है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये गिरफ्तारियां बिना किसी पुख्ता सबूत के की गई हैं, जो ईरान के भीतर बढ़ते डर और असुरक्षा को दर्शाती हैं।
रणनीतिक मोर्चे पर ईरान ने तेल व्यापार की जीवन रेखा मानी जाने वाली ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के पास मिसाइलें दागी हैं। इससे दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। इस बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी युद्ध में कूदने के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों को डर है कि यदि हूती सक्रिय होते हैं, तो वे ‘बाब अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य को बंद कर सकते हैं। यदि ये दोनों प्रमुख समुद्री रास्ते बंद हो जाते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऊर्जा के सबसे गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
मिडिल ईस्ट में जारी यह तनाव केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अब दुनिया के हर घर की रसोई और पेट्रोल टैंक तक पहुँचने वाला है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती यह सीधी जंग कूटनीतिक रास्तों को बंद कर रही है। रूस और चीन जैसी महाशक्तियां भी इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं। यदि आने वाले कुछ दिनों में सीजफायर या संवाद की स्थिति नहीं बनती है, तो यह संघर्ष आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय और आर्थिक आपदा में बदल सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया इस बात को लेकर आशंकित है कि अगला धमाका किस ओर होगा।
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