US Withdraws from WHO
US Withdraws from WHO: अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से खुद को अलग कर लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के कार्यान्वयन के रूप में, जिनेवा स्थित संगठन के मुख्यालय से अमेरिकी झंडे को हटा दिया गया है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस संबंध में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी पुष्टि की। यह कदम वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
संगठन से बाहर निकलने के बावजूद, अमेरिका ने अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को निभाने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका WHO को अपना लगभग 2600 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करेगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि विदाई के समय कोई कानूनी या वित्तीय विवाद शेष न रहे। हालांकि, इस भुगतान के बाद भविष्य में अमेरिका की ओर से संगठन को कोई भी नियमित आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी।
अमेरिका ने इस कठोर निर्णय के पीछे WHO के ‘इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट’ की विफलता को मुख्य कारण बताया है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि संगठन जानकारी को नियंत्रित, प्रबंधित और साझा करने में पूरी तरह विफल रहा। इस विफलता के कारण अमेरिका को खरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया है कि जब संगठन अपनी बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है, तो उसे फंड, समर्थन या संसाधनों की सहायता देना तर्कसंगत नहीं है।
यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने जनवरी 2025 में ही WHO को औपचारिक नोटिस भेज दिया था कि वह एक साल के भीतर संगठन छोड़ देगा। पिछले एक साल से अमेरिका लगातार संगठन को चेतावनी दे रहा था कि उसका प्रबंधन तंत्र विफल हो रहा है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं को भारी क्षति पहुँच रही है। संगठन द्वारा सुधार के कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण, अब अमेरिका ने अंतिम रूप से बाहर निकलने का रास्ता चुना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के हटने से न केवल संगठन बल्कि पूरी दुनिया पर इसका बुरा असर पड़ेगा। अमेरिका WHO का सबसे बड़ा वित्तीय मददगार था, जो संगठन के कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा देता था। इतनी बड़ी राशि रुकने से WHO के सामने गंभीर बजट संकट पैदा हो जाएगा। इससे महामारियों और स्वास्थ्य खतरों का पता लगाने, उनकी रोकथाम करने और त्वरित जवाब देने के लिए बनाया गया अंतरराष्ट्रीय सिस्टम काफी कमजोर हो सकता है।
अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि निकट भविष्य में उनकी संगठन में वापसी की कोई योजना नहीं है। अमेरिका अब अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा नीतियों को स्वतंत्र रूप से लागू करेगा। दूसरी ओर, WHO के प्रवक्ता ने इस विकासक्रम पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि फरवरी में होने वाली कार्यकारी बोर्ड (Executive Board) की बैठक में अमेरिका के बाहर निकलने और इससे उत्पन्न होने वाले अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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