Usman Hadi Murder Case
Usman Hadi Murder Case: बांग्लादेश की राजनीति और कानून व्यवस्था को हिला देने वाले बहुचर्चित उस्मान हादी हत्याकांड में एक नया और नाटकीय मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य संदिग्धों में से एक, फैसल करीम मसूद, जो लंबे समय से फरार चल रहा था, पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आया है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में मसूद ने हत्या के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस बयान ने बांग्लादेशी अधिकारियों के उन दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें उसके भारत में छिपे होने की बात कही गई थी।
वीडियो संदेश में फैसल करीम मसूद ने अपनी लोकेशन का खुलासा करते हुए दावा किया कि वह इस वक्त दुबई में है। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि उस्मान हादी की हत्या में उसकी कोई भूमिका नहीं है और उसे तथा उसके परिवार को राजनीतिक बदले की भावना के तहत फंसाया जा रहा है। मसूद ने बताया कि वह केवल अपनी जान बचाने और कानूनी उत्पीड़न से बचने के लिए बांग्लादेश छोड़कर दुबई आया है। उसने यह भी कहा कि वह जांच में सहयोग के लिए तैयार है, बशर्ते उसे निष्पक्ष सुनवाई का आश्वासन मिले।
मसूद ने अपने बयान में एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हादी की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा छात्र शिबिर के लोगों का हाथ हो सकता है। उसने तर्क दिया कि हादी खुद जमात से जुड़ा हुआ था और संगठन के आंतरिक मतभेदों के कारण उसे निशाना बनाया गया होगा। मसूद ने स्वीकार किया कि उसके हादी के साथ संबंध थे, लेकिन वे पूरी तरह व्यापारिक थे। उसने बताया कि उसकी एक आईटी फर्म है और हादी ने उसे सरकारी ठेके दिलाने का वादा किया था, जिसके बदले उसने हादी को राजनीतिक चंदा भी दिया था।
उस्मान हादी, जो जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा थे, उनकी 12 दिसंबर को ढाका में गोली मारकर हत्या करने की कोशिश की गई थी। उन्हें गंभीर स्थिति में इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहाँ 18 दिसंबर को उन्होंने अंतिम सांस ली। हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भारी हिंसा भड़क उठी थी। आक्रोशित भीड़ ने मीडिया संस्थानों के कार्यालयों में आग लगा दी थी और ढाका स्थित भारतीय मिशन पर भी पथराव किया गया था, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से भारतीय वीजा केंद्रों को बंद करना पड़ा था।
इस मामले में सबसे पेचीदा मोड़ तब आया जब बांग्लादेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एसएन नजरुल इस्लाम ने दावा किया कि फैसल मसूद और एक अन्य संदिग्ध आलमगीर शेख हालुआघाट सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश कर गए हैं। ढाका पुलिस के अनुसार, उन्हें मेघालय तक पहुँचाने में दो भारतीय नागरिकों ने मदद की थी। हालांकि, भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिरीक्षक (IG) ओपी उपाध्याय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ऐसी किसी भी घुसपैठ का कोई सबूत या रिपोर्ट नहीं मिली है।
फैसल मसूद के इस ताजा वीडियो बयान ने बांग्लादेशी जांच एजेंसियों की थ्योरी को उलझा दिया है। जहाँ एक ओर पुलिस उसे भारत में तलाश रही थी, वहीं उसका दुबई से संदेश देना तकनीकी जांच पर सवाल उठाता है। उस्मान हादी हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों के बीच एक तनावपूर्ण मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह है कि बांग्लादेश सरकार मसूद के प्रत्यर्पण के लिए क्या कदम उठाती है।
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