Vaishno Devi Landslide: माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर 26 अगस्त को हुए भूस्खलन के बाद यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस घटना के चलते सैकड़ों श्रद्धालु कटरा में फंसे हुए हैं, लेकिन स्थानीय होटल मालिक और रेस्टोरेंट संचालक इन श्रद्धालुओं की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से आए श्रद्धालु अमिश चौधरी ने भावुक होते हुए बताया, “हम चार लोग 26 अगस्त को कटरा पहुंचे थे, लेकिन यात्रा रुक गई। होटल मालिक ने हमसे एक रुपया नहीं लिया, और नाश्ते से लेकर रात के खाने तक का इंतज़ाम कर रहे हैं। वो कहते हैं, माता के दर्शन कराए बिना नहीं लौटने देंगे।”

कटरा होटल्स एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वजीर के अनुसार, कटरा में लगभग 300 होटल और गेस्ट हाउस हैं जिनमें करीब 6,000 कमरे हैं। इनमें से 200 कमरे उन्होंने फंसे हुए श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए हैं। इसके अलावा 200 श्रद्धालु धर्मशालाओं में रह रहे हैं।
राकेश वजीर कहते हैं, “हम श्रद्धालुओं को उनकी पसंद का भोजन और आवास दे रहे हैं। यह हमारे लिए घाटे का सौदा जरूर है, लेकिन संकट की घड़ी में मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है।”
यात्रा मार्ग पर जारी है मरम्मत कार्य
श्री वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने बताया कि भूस्खलन से प्रभावित 18 किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर मरम्मत का कार्य जारी है। सुरक्षा की दृष्टि से एशिया चौक से दर्शनी ड्योड़ी तक के संवेदनशील इलाकों में स्थित होटलों और दुकानों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं।
एक श्राइन बोर्ड अधिकारी के अनुसार, “इन संवेदनशील इलाकों में 80 से ज्यादा दुकानें और छोटे होटल आते हैं। ये सभी इलाके भूस्खलन संभावित क्षेत्र में हैं।”
पूर्व में मंदिर का प्रबंधन कर चुकी बरिदर सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष शेर सिंह बरिदराम बताते हैं कि पहले कटरा में रोज़ाना करीब 30,000 श्रद्धालु रहते थे, लेकिन पिछले एक हफ्ते से पूरा क्षेत्र सन्नाटे में है।
26 अगस्त को बड़ा हादसा
भूस्खलन की सबसे बड़ी त्रासदी अर्द्धकुंवारी मंदिर के पास हुई, जहां 34 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई। इसके बाद से यात्रा मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया। श्राइन बोर्ड ने हेलिकॉप्टर सेवा, रोपवे टिकट, भवन और भैरों घाटी में होटल बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं को पूर्ण रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कटरा के होटल मालिकों और स्थानीय निवासियों की सेवा भावना इस कठिन समय में श्रद्धालुओं के लिए संबल बनकर उभरी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मरम्मत कार्य जल्द से जल्द पूरा हो और माता वैष्णो देवी की यात्रा फिर से सुचारु रूप से शुरू हो सके।
Read More : Parivartini Ekadashi 2025: 3 सितंबर को रखा जाएगा व्रत, जानिए पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व










