VB-G RAM G Bill
VB-G RAM G Bill: मंगलवार को लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025’ पेश किया। यह विधेयक यदि संसद में पारित हो जाता है, तो यह मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) का स्थान ले लेगा। बिल की कॉपी सोमवार को ही लोकसभा सांसदों के बीच वितरित कर दी गई थी। इस बिल के पेश होते ही सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी (रायबरेली से सांसद) ने बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है।
नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का एक नया ढांचा तैयार करना है। नए प्रावधानों के तहत, काम के दिनों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र के 12वें दिन दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में कार्यवाही शुरू होने के बाद पेश किया गया। सरकार का लक्ष्य अब दोनों सदनों में लंबित विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित करने की प्रक्रिया को तेज करना है।
मोदी सरकार द्वारा लाए गए इस नए विधेयक, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘जी राम जी’ बिल कहा जा रहा है, के खिलाफ लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने विधेयक पर ‘हल्ला बोल’ करते हुए कहा कि उन्हें सरकार की नाम बदलने की यह सनक समझ में नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘जी राम जी’ बिल के जरिए ग्राम पंचायतों के अधिकार छीने जा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस की एक अन्य सांसद रंजीता रंजन ने कहा कि नाम बदलकर सरकार जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटका रही है और सरकार को अब महात्मा गांधी के नाम से भी दिक्कत होने लगी है।
विपक्षी दलों के भारी हंगामे के चलते, ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025’ को आगे की समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त समिति (Joint Parliamentary Committee) को भेजा गया है। मनरेगा की जगह आ रहे इस बिल को लेकर लोकसभा में विपक्षी सांसद जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा, “मुझे नाम बदलने की यह सनक समझ नहीं आती। इसमें खर्चा बहुत होता है इसलिए मुझे समझ नहीं आता कि वे बेवजह ऐसा क्यों कर रहे हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि MGNREGA ने गरीब लोगों को 100 दिन के रोजगार का कानूनी अधिकार दिया था, लेकिन यह बिल उस अधिकार को कमजोर करेगा। उन्होंने माना कि दिनों की संख्या 125 कर दी गई है, लेकिन मजदूरी नहीं बढ़ाई गई है।
उन्होंने विधेयक के केंद्रीकरण वाले हिस्से पर आपत्ति जताई: “पहले ग्राम पंचायत तय करती थी कि MGNREGA का काम कहां और किस तरह का होगा, लेकिन यह बिल कहता है कि केंद्र सरकार तय करेगी कि फंड कहां और कब देना है, इसलिए ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा है।” उन्होंने अंत में कहा कि उन्हें यह बिल हर तरह से गलत लगता है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी इस विधेयक पर निशाना साधते हुए कहा कि UPA सरकार ने MGNREGA कानून पेश किया था और यह सबसे सफल योजना रही है। उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान इसकी महत्ता बताई, जब लाखों लोग शहरों से गांवों में लौटे थे और MGNREGA ने उन्हें सुरक्षा दी थी।
उन्होंने नामकरण पर कटाक्ष करते हुए कहा, “जब नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारी, तो उनके मुंह से सिर्फ ‘हे राम’ शब्द निकले और यह अजीब बात है कि इस देश में आप महात्मा गांधी को भगवान राम से अलग कर रहे हैं।” तिवारी ने गंभीर आरोप लगाया कि यह योजना, जो पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा फंडेड थी, उसे तोड़-मरोड़कर इसका बोझ राज्यों पर डाला जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसा करने से यह योजना धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।
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