WHO Alert : वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप ने देश को एक ऐसे अंधकारमय संकट में धकेल दिया है, जिससे उबरना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। मलबे के ढेर में दबी लाशों और घायल लोगों की कराह के बीच, अब एक नया और अधिक खतरनाक खतरा सिर उठा रहा है—महामारियों का। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को अत्यंत गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से पंगु हो चुकी हैं। अस्पतालों पर मरीजों का दबाव उनकी क्षमता से कहीं अधिक है, जिसके कारण कभी भी जानलेवा बीमारियों का प्रकोप फैल सकता है। जेनेवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान WHO प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने स्पष्ट किया कि भूकंप से उपजी ट्रॉमा और इमरजेंसी स्थितियों ने पूरे हेल्थ सिस्टम को घुटनों पर ला दिया है।

मौत का आंकड़ा 1700 के पार, बढ़ता जा रहा लापता लोगों का दर्द
सरकारी आंकड़ों की मानें तो दोहरे भूकंप (7.5 और 7.2 तीव्रता) के झटकों ने वेनेजुएला की कमर तोड़ दी है। अब तक 1,700 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हैं। हालांकि सरकार ने लापता लोगों पर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मलबे में दबे लोगों की संख्या हजारों में हो सकती है। स्थिति इतनी दयनीय है कि अस्पतालों के मुर्दाघर पूरी तरह भर चुके हैं और फॉरेंसिक सेवाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं। शवों का पंजीकरण करना और लापता लोगों को खोजना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

वैक्सीन की कमी और दूषित पानी का बढ़ता खतरा
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से पूर्व ही वेनेजुएला में बच्चों और नागरिकों का वैक्सीनेशन कवरेज बहुत कम था। इस स्थिति में खसरा और डिप्थीरिया जैसी बीमारियों का तेजी से फैलना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा, भूकंप के कारण जल आपूर्ति प्रणाली के प्रभावित होने से दूषित पानी और गंदगी का अंबार लग गया है। इससे येलो फीवर, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जीका जैसी मच्छर और जल-जनित बीमारियां बहुत जल्द महामारी का रूप ले सकती हैं। यदि समय रहते टीकाकरण और स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मरने वालों का आंकड़ा और अधिक तेजी से बढ़ सकता है।
अस्पतालों की जर्जर हालत और डॉक्टरों का मानसिक दबाव
भूकंप की चपेट में आने से देश के कम से कम 38 प्रमुख अस्पताल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। काराकास, ला गुएरा, मिरांडा और फाल्कन जैसे इलाकों के 21 स्वास्थ्य केंद्रों का विश्लेषण करने पर पता चला कि 6 अस्पतालों की इमारतें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि 3 की स्थिति अत्यंत नाजुक है। बचे हुए अस्पताल संसाधनों के अभाव और मरीजों की अंतहीन भीड़ के बीच बेबस नजर आ रहे हैं। न तो वहां बायो-सेफ्टी के नियमों का पालन हो पा रहा है और न ही डॉक्टरों को काम करने का उचित वातावरण मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मदद की दरकार और भविष्य की चुनौतियां
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने चेतावनी दी है कि समय पर राहत सामग्री न पहुंचने से स्थानीय लोगों में गहरा गुस्सा और तनाव पनप रहा है। अगले छह महीनों में 30,000 पीड़ितों को आश्रय और टेंट मुहैया कराने के लिए 1.48 करोड़ डॉलर की तत्काल फंडिंग की आवश्यकता है। वहीं, ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (MSF) अब राहत के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य परामर्श पर जोर दे रही है, क्योंकि अपनों को खोने के गम में डूबे हजारों लोग गहरे सदमे में हैं। मलबे से जान बचाने का काम अंतिम चरण में है, लेकिन जीवित बचे लोगों को बचाने की असली जंग अब शुरू हुई है।
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