Congress BJP Row : संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और राजनयिक शैली पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है। रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को अभद्र बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता अपने राजनीतिक अंदाज के जरिए न केवल खुद की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि भारत की वैश्विक छवि पर भी प्रतिकूल असर डाल रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में यह प्रतिक्रिया दी।
पीएम मोदी की कूटनीति का मजाक उड़ाने का आरोप
रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक शैली का नाटकीय अंदाज में मजाक उड़ाने की कोशिश की। हालांकि, उनके मुताबिक ऐसा करके राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने के बजाय खुद की राजनीतिक विश्वसनीयता को कमजोर किया। मंत्री ने दावा किया कि इस तरह की बयानबाजी से राहुल गांधी की सार्वजनिक छवि पर गंभीर असर पड़ सकता है और उससे उबरना उनके लिए आसान नहीं होगा।
कांग्रेस के कार्यक्रम में राहुल की टिप्पणी
यह विवाद 13 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाया और इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी की संवाद शैली तथा विदेशी नेताओं के साथ उनकी कूटनीतिक बातचीत की नकल करते हुए कटाक्ष किया। इस दौरान संदीप दीक्षित ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि कहीं राहुल गांधी ने उन्हें इटली की पूर्व प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगाया। राहुल के जवाब पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
संसदीय आचरण को लेकर भी कांग्रेस पर हमला
किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के संसदीय आचरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और बहस में हिस्सा लेने के बजाय अक्सर नारेबाजी तथा हंगामे का रास्ता अपनाते हैं। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के नेता के पद पर रहने वाले व्यक्ति से संसदीय मर्यादा और जिम्मेदारी के अनुरूप व्यवहार की अपेक्षा होती है।
राहुल गांधी से व्यक्तिगत मतभेद नहीं: रिजिजू
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी से उनका कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता एक-दूसरे से मिलते हैं और बातचीत भी होती है। हालांकि, उनके मुताबिक लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद महत्वपूर्ण और संवैधानिक जिम्मेदारी वाला है। इसलिए इस पद पर बैठे व्यक्ति को सदन में अपने वक्तव्य और व्यवहार से एक उदाहरण पेश करना चाहिए।
विपक्षी सांसदों पर भी लगाया आरोप
रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी की संसदीय शैली का प्रभाव कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों पर भी दिखाई देता है। उनका आरोप है कि विपक्ष के नेता जिस तरह सदन में विरोध और व्यवधान की राजनीति करते हैं, उसी का अनुसरण दूसरे सांसद भी करने लगते हैं। इससे संसद में गंभीर और रचनात्मक चर्चा का माहौल प्रभावित होता है।
विदेश नीति को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच विदेश नीति, प्रधानमंत्री की कूटनीतिक गतिविधियों तथा विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर लगातार टकराव देखने को मिला है। राहुल गांधी कई मौकों पर प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और विदेशी नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि ऐसे बयानों से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर भी विवाद
संसद के मौजूदा सत्र में विदेश नीति के अलावा जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। विपक्ष ने सरकार से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह संसद के नियमों के तहत संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है।
रिजिजू ने बताया सतही राजनीतिक नाटक
रिजिजू ने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणी को सतही नाटकबाजी करार दिया। उनका कहना है कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नेताओं को बयान देते समय जिम्मेदारी और गंभीरता का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की विदेश नीति का मजाक उड़ाने की कोशिश भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को कमजोर करने वाली राजनीति का उदाहरण है।
राजनीतिक टकराव और बढ़ने के संकेत
राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय सामने आई है, जब संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखा टकराव चल रहा है। ऐसे में विदेश नीति, संसदीय मर्यादा और विपक्ष की भूमिका को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।
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