Vice President resigns : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “इस अप्रत्याशित इस्तीफे में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि वे धनखड़ को मनाने का प्रयास करें। यह राष्ट्रहित में होगा और विशेषकर कृषक समुदाय को इससे राहत मिलेगी।”
जयराम रमेश के बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बना दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य से इतर राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं।
शिवसेना नेता की चिंता: “स्वास्थ्य कारण होते तो समय और होता”
शिवसेना (UBT) के नेता आनंद दुबे ने भी इस्तीफे पर हैरानी जताते हुए कहा, “यदि स्वास्थ्य कारण ही वजह थे, तो इस्तीफा मानसून सत्र से कुछ दिन पहले या बाद में भी दिया जा सकता था। पहले ही दिन इस्तीफा देना संदेह उत्पन्न करता है। सरकार में क्या चल रहा है, यह बड़ा सवाल है।”
उन्होंने इसे “चिंताजनक” करार देते हुए उपराष्ट्रपति के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
CPI सांसद ने जताई आशंका: “राष्ट्रपति शायद स्वीकार न करें इस्तीफा”
CPI सांसद पी. संदोष कुमार ने इस घटनाक्रम को “अप्रत्याशित और रहस्यमयी” बताया। उन्होंने कहा, “हमें नहीं लगता कि राष्ट्रपति इस इस्तीफे को स्वीकार करेंगे। संभव है यह केवल शुरुआती प्रतिक्रिया हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि धनखड़ कुछ घटनाओं से असंतुष्ट हो सकते हैं और इस्तीफा उसी असंतोष की अभिव्यक्ति हो सकता है।
जयराम रमेश ने बताई घटनाओं की टाइमलाइन
जयराम रमेश ने बताया कि उन्होंने 21 जुलाई की शाम लगभग 5 बजे धनखड़ से अन्य सांसदों के साथ मुलाकात की थी और 7:30 बजे फोन पर बातचीत भी हुई थी। उन्होंने लिखा, “यह स्पष्ट है कि इस्तीफे के पीछे का कारण जो बताया जा रहा है, उसके पीछे कुछ और है। हालांकि यह अटकलों का समय नहीं है।”
उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति कार्य मंत्रणा समिति की बैठक मंगलवार को करने वाले थे और न्यायपालिका से जुड़ी कुछ बड़ी घोषणाएं भी तय थीं।
विपक्ष के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं: “सिर्फ स्वास्थ्य कारण नहीं लगते”
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, “यह बहुत ही चौंकाने वाली घटना है। उपराष्ट्रपति ने आज सुबह ही राज्यसभा सत्र की अध्यक्षता की थी। राजनीति में मतभेद होते हैं, लेकिन हम उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।”
कांग्रेस के दानिश अली ने कहा, “यह स्वास्थ्य वजह नहीं लगती। भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं के बयान धनखड़ की गरिमा के अनुकूल नहीं थे। उनके जस्टिस यादव और जस्टिस वर्मा को लेकर सरकार से मतभेद भी थे।” उन्होंने कहा, “धनखड़ हमेशा कहते रहे हैं कि वे किसी के दबाव में नहीं आएंगे।”
सुखदेव भगत का बयान: “राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता”
कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने कहा, “धनखड़ के इस्तीफे के पीछे राजनीतिक पटकथा पहले से ही लिखी जा चुकी हो सकती है। बिहार चुनाव नजदीक हैं और इससे जुड़े कई राजनीतिक समीकरण इस कदम से प्रभावित हो सकते हैं।”
उन्होंने इशारा किया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की इच्छा के अनुसार अप्रत्याशित निर्णय लिए जाते हैं।
महाभियोग का इतिहास: धनखड़ पहले उपराष्ट्रपति जिनके खिलाफ लाया गया प्रस्ताव
भारत के 72 वर्षों के संसदीय लोकतंत्र में यह पहली बार हुआ जब उपराष्ट्रपति धनखड़ के खिलाफ दिसंबर 2024 में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। यह प्रस्ताव तकनीकी कारणों से खारिज हो गया था, लेकिन इससे उनके पद पर सवाल जरूर खड़े हुए थे।
विपक्ष उन पर लगातार पक्षपात के आरोप लगाता रहा है। उनका दावा था कि उपराष्ट्रपति सिर्फ विपक्ष की आवाज़ दबाने का काम करते हैं और उनके सांसदों को पर्याप्त मौका नहीं दिया जाता।
धनखड़ का राजनीतिक सफर: कई पद संभाले, लेकिन कार्यकाल अधूरा
धनखड़ का करियर हमेशा प्रभावशाली रहा है। उन्होंने कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई, लेकिन वह शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा कर पाए हों। केवल एक बार विधायक रहते हुए उनका पांच साल का कार्यकाल पूरा हुआ था।
अब उनके इस अप्रत्याशित इस्तीफे ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है कि आखिर उनके फैसले के पीछे की वास्तविक वजह क्या है?
धनखड़ का इस्तीफा जहां एक ओर स्वास्थ्य कारण बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक असंतोष, महाभियोग के दाग, और आंतरिक दबावों से जोड़कर देख रहा है। अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या वह इस्तीफा स्वीकार करते हैं या नहीं, और इस घटनाक्रम का अगला अध्याय क्या होगा।