Vinesh Phogat on Brij Bhushan : दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में सह-आरोपी और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी राहत देते हुए बरी कर दिया। इस फैसले के बाद देशभर में खेल जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अदालत ने अंतिम बहस पूरी होने के बाद 2 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।

विनेश फोगाट ने फैसले पर जताई नाराजगी
अदालत के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय पहलवान विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई की शुरुआत करना आसान नहीं था और महिला पहलवानों को एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए काफी साहस जुटाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले के दौरान कई महिला पहलवानों पर दबाव बनाया गया और कुछ ने अपने आरोप वापस भी ले लिए। इसके बावजूद कई महिला खिलाड़ी न्याय की उम्मीद में अदालत में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखती रहीं।

‘हमने उम्मीद नहीं छोड़ी’
विनेश फोगाट ने अपने बयान में कहा कि अदालत के फैसले से उन्हें निराशा जरूर हुई है, लेकिन उन्होंने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के निर्देश दे दिए हैं और जल्द ही उच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।
सिस्टम पर भी लगाए गंभीर आरोप
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विनेश फोगाट ने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही पूरा तंत्र और सरकारी व्यवस्था बृजभूषण शरण सिंह के पक्ष में दिखाई दी। उन्होंने कहा कि महिला पहलवानों को न्याय पाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हुए अब अगला कदम अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करना होगा। उनके अनुसार, पहलवानों का संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है।
फैसले से पहले क्या बोले थे बृजभूषण शरण सिंह?
फैसला सुनाए जाने से पहले बृजभूषण शरण सिंह सोमवार सुबह दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे थे। मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह अदालत के फैसले का इंतजार करेंगे और निर्णय आने से पहले इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। इसके बाद अदालत में सुनवाई शुरू हुई और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने दोनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।

कैसे शुरू हुआ था पूरा मामला?
यह मामला छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। वर्ष 2023 में देश के कई प्रमुख पहलवानों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करते हुए बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे। ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट सहित कई खिलाड़ियों ने सार्वजनिक रूप से न्याय की मांग की थी। शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह और डब्ल्यूएफआई के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
चार्जशीट और ट्रायल की पूरी प्रक्रिया
दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। इसके बाद मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने पांच महिला पहलवानों से जुड़े मामलों में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित आरोप तय किए थे। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने साक्ष्य और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था और अब आरोपियों को बरी कर दिया है।
नाबालिग पहलवान का मामला पहले ही हो चुका था बंद
इस पूरे प्रकरण में एक नाबालिग पहलवान ने भी बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (पॉक्सो) के तहत दर्ज मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी, जिसे स्वीकार किए जाने के बाद वह मामला बंद हो गया। अब वयस्क महिला पहलवानों से जुड़े मामले में भी अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है। वहीं, महिला पहलवानों की ओर से फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।
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