Nepal PM resigns: नेपाल में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल और जनआंदोलन के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब देशभर में अशांति चरम पर पहुंच चुकी है और प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन को आग के हवाले कर दिया।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नेपाली सेना के प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि जब तक प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया जाता, हालात सामान्य नहीं होंगे। आर्मी की इस चेतावनी के बाद ओली ने मंगलवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे तत्काल स्वीकार कर लिया गया।
नेपाल सरकार द्वारा देश में सोशल मीडिया ऐप्स पर अचानक बैन लगाए जाने के बाद खासतौर पर युवा पीढ़ी (Gen-Z) में आक्रोश फैल गया। इस फैसले को अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला मानते हुए हजारों की संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते आंदोलन हिंसक रूप लेने लगा और राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
सबसे बड़ी घटना तब हुई जब उग्र प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर हमला बोलते हुए उसे आग के हवाले कर दिया। सुरक्षाबलों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हिंसा काबू से बाहर हो गई। हालात को देखते हुए कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
केपी शर्मा ओली का राजनीतिक सफर लंबा और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे पहली बार 2015 में नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे। दूसरी बार 2018 में सत्ता संभाली और तीसरी बार जुलाई 2024 में पद ग्रहण किया। अगस्त 2025 तक तीसरी बार उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में काम किया, लेकिन हर बार उन्हें जनविरोध या राजनीतिक दबाव के चलते इस्तीफा देना पड़ा।
काठमांडू, पोखरा, विराटनगर, और नेपालगंज जैसे बड़े शहरों में हिंसा की खबरें हैं। कई स्थानों पर कर्फ्यू लगाना पड़ा है। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया है।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने इस्तीफे से पहले राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “मैं देश की शांति और स्थिरता के लिए अपने पद से हटने का फैसला ले रहा हूँ। जनता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए।” वहीं राष्ट्रपति भवन से जानकारी मिली है कि राजनीतिक संकट के समाधान के लिए सभी दलों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है।
भारत, चीन और अमेरिका समेत कई देशों ने नेपाल में शांति की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने का आग्रह किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल एक बार फिर संवैधानिक संकट की ओर बढ़ रहा है। इस्तीफे के बाद अगली सरकार कौन बनाएगा, यह अब संसद के समीकरणों पर निर्भर करेगा। नेपाली कांग्रेस और माओवादी सेंटर जैसे दलों की भूमिका अब निर्णायक हो सकती है।
नेपाल इस समय संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। जनता की मांगें और सरकार की प्रतिक्रिया दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी और संवाद पर निर्भर करेगा।
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