Vishi Kumar Dowry Case : बिहार के खगड़िया जिले में एक बार फिर दहेज प्रथा से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भरखंडी टोला गांव में विवाहिता विशी कुमार की मौत का मामला प्रकाश में आया है, जिसमें परिवार वालों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर पति पर अपनी पत्नी को फांसी के फंदे पर लटकाकर हत्या करने का आरोप लगाया है।

यह घटना ग्रेटर नोएडा के निक्की मर्डर केस से काफी मिलती-जुलती है, जहां निक्की की 36 लाख रुपये की दहेज मांग पूरी न होने पर पति विपिन भाटी और ससुराल वालों ने उसे जिंदा जलाकर मार डाला था। दोनों मामलों में दहेज की लालसा और घरेलू हिंसा की गहरी छवि देखने को मिलती है।

बहनों ने उठाया मामला, बताया सच्चाई
निक्की केस में जैसे उसकी बहन कंचन ने पुलिस को पूरी सच्चाई बताई थी, ठीक वैसे ही बिहार के मामले में भी विशी की बहन बेबी देवी ने खुलकर बताया कि विशी की शादी में उनके पिता ने अपनी क्षमता के अनुसार दहेज दिया था, लेकिन ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे।
बेबी देवी ने बताया कि विशी को रोजाना मारपीट सहनी पड़ती थी। हाल ही में उनके भाई संजीत की शादी के दौरान, जोड़ा गया कि विशी के जीजा ने सोने की चेन की मांग की थी, जिसे लेकर विवाद काफी बढ़ गया था। इसी झगड़े के दौरान पति ने मौका पाकर अपनी पत्नी को फांसी लगाकर मार डाला।
घटना स्थल और पुलिस की कार्रवाई
विशी कुमारी की हत्या की यह वारदात खगड़िया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भरखंडी टोला गांव में हुई। मृतका मूलतः मुंगेर की रहने वाली थी और उसकी शादी एक साल पहले खगड़िया में हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए खगड़िया सदर अस्पताल भेज दिया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पति और अन्य आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा की बढ़ती समस्या
विशी कुमारी की हत्या ने फिर से दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा के खतरनाक स्वरूप को उजागर किया है। बिहार समेत पूरे देश में दहेज की मांग को लेकर महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही है। सामाजिक संगठनों और कानून व्यवस्था की तरफ से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है।
खगड़िया में विशी कुमार की दर्दनाक मौत और ग्रेटर नोएडा में निक्की की हत्या दोनों मामले देश के लिए एक बार फिर दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। यह आवश्यक है कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान बढ़े और दहेज जैसे कुप्रथाओं को जड़ से खत्म किया जाए।
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