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Vishwakarma Jayanti 2025: स्वर्ण लंका से द्वारका तक, जानिए भगवान विश्वकर्मा के दिव्य शिल्प और अद्भुत निर्माण

Vishwakarma Jayanti 2025: हर वर्ष की तरह इस बार भी 17 सितंबर 2025 को पूरे देश में विश्वकर्मा जयंती श्रद्धा और उत्साह से मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विश्वकर्मा, जो देवताओं के शिल्पकार, वास्तुविद और प्रथम इंजीनियर माने जाते हैं, की पूजा की जाती है। शिल्प, वास्तुकला, मशीनरी, यंत्र, औद्योगिक उपकरण और निर्माण कार्यों में लगे लोग इस दिन अपने उपकरणों की पूजा कर उन्हें सम्मान देते हैं।

पर क्या आप जानते हैं कि भगवान विश्वकर्मा केवल औजारों और मशीनों के देवता नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के महान रचनाकार भी माने जाते हैं? पौराणिक ग्रंथों में वर्णित कई प्रसिद्ध नगरों, भवनों और दिव्य संरचनाओं का निर्माण भगवान विश्वकर्मा द्वारा किया गया था।

1. स्वर्ण लंका – त्रेतायुग की अमर कृति

भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित स्वर्ण लंका त्रेतायुग की सबसे भव्य और समृद्ध नगरी मानी जाती है।

इसे सबसे पहले कुबेर के लिए बनाया गया था।

बाद में रावण ने इसे बलपूर्वक अपने अधिकार में ले लिया।

यह नगरी सोने से निर्मित थी, जिसमें अद्भुत महल, आभूषणों से जड़े स्तंभ और स्वर्ण सिंहासन थे।
आज भी “सोने की लंका” एक कहावत बन चुकी है जो किसी भव्य स्थान का प्रतीक है।

2. द्वारका नगरी – श्रीकृष्ण की समुद्री नगरी

भगवद पुराण और महाभारत में वर्णन है कि भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद समुद्र के बीच एक दिव्य नगरी बसाई, जिसका नाम था द्वारका।

इसके शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा ही थे।

द्वारका को इतना मजबूत और अलौकिक बनाया गया था कि समुद्री लहरें भी उसे हिला नहीं सकीं।

नगरी में रत्नजटित महल, भव्य द्वार और सुंदर उद्यान थे, जो वास्तुशिल्प के चमत्कारी उदाहरण हैं।

3. इंद्रप्रस्थ और मयसभा – पांडवों के लिए मायावी नगरी

महाभारत में वर्णित इंद्रप्रस्थ नगरी और उसमें स्थित मयसभा का निर्माण भी विश्वकर्मा द्वारा किया गया था।

यह सभा इतनी भव्य और मायावी थी कि दुर्योधन तक भ्रमित हो गया और जल को भूमि समझकर गिर पड़ा।

विश्वकर्मा की यह कला 3D illusion जैसी प्रतीत होती है, जिसे आज के आधुनिक डिज़ाइन से भी जोड़कर देखा जा सकता है।

4. कुबेर का भवन और यक्षपुरी

धन के देवता कुबेर के भव्य भवन और यक्षों की नगरी यक्षपुरी का निर्माण भी विश्वकर्मा ने किया था।

यह नगरी दुर्लभ रत्नों, स्वर्ण और चंद्रकांति धातुओं से बनी थी।

इसकी दीवारों पर चित्रकला और नक्काशी का अद्भुत समन्वय था, जो आज भी वास्तुकला के लिए प्रेरणा स्रोत है।

5. स्वर्ग लोक और देवताओं के भवन

भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्ग लोक, इंद्रपुरी, वज्र, इंद्रधनुष, और देवताओं के अस्त्र-शस्त्र तक का निर्माण किया।

उनके बनाए हुए यंत्रों और भवनों में ज्योति, विज्ञान और ऊर्जा का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।

विश्वकर्मा जयंती 2025 न केवल एक पूजा का दिन है, बल्कि भारत की वास्तु, शिल्प और तकनीकी परंपरा की जड़ें पहचानने का अवसर भी है।

आज के इंजीनियर, आर्किटेक्ट और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा की प्रेरणा से आधुनिक भारत का निर्माण कर रहे हैं।

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