नई दिल्ली@thetarget365: वक्फ (संशोधन) विधेयक-2024 आज ( बुधवार, 2 अप्रैल 2025) को संसद में पेश किया जाना है। सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसदों में इसे लेकर जबरदस्त टकराव की आशंका है। आइए जानते हैं वक्फ (संशोधन) विधेयक क्या है? सरकार इसे क्यों पारित कराना चाहती है और विपक्षी पार्टियों को क्या डर है?
वक्फ अधिनियम-1995 वक्फ बोर्डों को नियंत्रित करने वाला एक कानून है। जिसे सरकार संशोधन करना चाहती है। ताकि, बोर्डों के कामकाज में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता लाई जा सके। इसमें महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की जा सके।
मुस्लिम समुदाय की नाराजगी के बीच वक्फ संशोधन बिल 2024 बुधवार को लोकसभा और गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। इस पर चर्चा के लिए दोनों सदनों में 8-8 घंटे यानी 16 घंटे निर्धारित किए गए हैं। विपक्षी दलों के विरोध और सहयोगी दल टीडीपी और जेडी (यू) की मांग पर इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा था। जिसमें कुछ संशोधन के बाद फिर सदन में लाया जा रहा है।
वक्फ मुस्लिम कानून द्वारा मान्यता प्राप्त धार्मिक, धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए चल-अचल संपत्तियों का रख रखाव करता है। जबकि, वक्फ अधिनियम, 1995 के अनुसार, वक्फ इस्लाम में पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए चल या अचल संपत्तियों को नियंत्रित करता है।
वक्फ संपत्तियां इस्लाम के अनुयायियों द्वारा दान की जाती हैं और समुदाय के सदस्यों द्वारा प्रबंधित की जाती हैं। हर राज्य में वक्फ बोर्ड होता है, जिसे कानूनी तौर मान्यता दी गइ है। वक्फ संपत्तियों का अधिग्रहण, रख रखाव और हस्तांतरण वक्फ बोर्ड ही करता है। इन्हें स्थायी रूप से बेचा या लीज पर नहीं दिया जा सकता। मुस्लिम समुदाय की यह सार्वजनिक सम्पत्तियां होती हैं।
भारत में वक्फ बोर्ड लगभग 9.4 लाख एकड़ की 8.7 लाख संपत्तियों को नियंत्रित और प्रबंधित करता है। इनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ है। भारतीय रेलवे और सशस्त्र बलों के बाद भारत में यह तीसरा सबसे बड़ा भूमि मालिक संस्था है।
वक्फ अधिनियम-1995 में संशोधन कर वक्फ संपत्तियों के मूल्यांकन का अधिकार जिला कलेक्टरों को मिलेगा। इसके लिए सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीयन कराना होगा। अभी वक्फ बोर्ड के अधिकांश सदस्य निर्वाचित होते हैं, लेकिन नया कानून बनने के बाद सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाएगी। मुस्लिम समुदाय को आशंका है कि कानून में संशोधन से सत्ता से जुड़े लोगों का बोर्ड पर नियंत्रण हो जाएगा। प्रस्तावित कानून के अनुसार, वक्फ बोर्ड का सीईओ गैर-मुस्लिम भी बन सकता है। साथ ही कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे।
भारत में 30 वक्फ बोर्ड संचालित हैं। मुख्य तौर पर कृषि भूमि, भवन, दरगाह/मजार और कब्रिस्तान, ईदगाह, खानकाह, मदरसे, मस्जिद, भूखंड, तालाब, स्कूल, दुकानें सहित अन्य संस्थान इनकी सम्पत्तियां हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वक्फ से जुड़े 40,951 मामले विवादित हैं। 9,942 मामले मुस्लिम समुदाय ने वक्फ संस्थाओं के खिलाफ दायर किए हैं।
पिछले कुछ सालों से वक्फ बोर्ड को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनमें संपत्ति प्रबंधन, कानूनी विवाद, महिला प्रतिनिधित्व और नियमों में सुधारों की जरूरत भी शामिल है। कुछ मामले वक्फ बोर्ड न्यायाधिकरण और कुछ उच्च न्यायालय में में विचाराधीन हैं।
वक्फ अधिनियम, 1995 के अनुसार, सर्वेक्षण आयुक्त स्थानीय जांच, गवाह और सार्वजनिक दस्तावेजों के आधार पर वक्फ की संपत्तियों को सूचीबद्ध करता है। वक्फ का प्रबंधन एक मुतवल्ली द्वारा किया जाता है, जो पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है।
निजी संपत्ति वक्फ की संपत्ति नहीं घोषित की जा सकती, लेकिन इस्लाम से जुड़ी वह संपत्तियां जो धार्मिक या सामाजिक कार्य के लिए दान की गई थीं और उनका उपयोग निजी उद्देश्य के लिए किया जा रहा है, वक्फ बोर्ड उन पर दावा कर सकता है।
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