WB Voter List Case
WB Voter List Case: माननीय उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के दौरान 10वीं या माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड अकेले पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने इसे एक ‘पूरक’ या सहायक दस्तावेज की श्रेणी में रखा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान जोर देकर कहा कि पहचान सत्यापन के लिए एडमिट कार्ड केवल तभी मान्य होगा, जब आवेदक उसके साथ अपनी मार्कशीट या पासिंग सर्टिफिकेट भी संलग्न करे।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया था कि क्या कक्षा 8वीं का एडमिट कार्ड स्वतंत्र रूप से पहचान पत्र के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सत्यापन के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार, कक्षा 8वीं की मार्कशीट एक वैध दस्तावेज है, लेकिन एडमिट कार्ड का उपयोग केवल उस मार्कशीट में दी गई जानकारी की पुष्टि के लिए एक सहयोगी कागज के रूप में ही किया जा सकता है। अदालत ने दोहराया कि अकेले एडमिट कार्ड को पहचान का आधार बनाना सुरक्षा और प्रमाणिकता के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल सहित देश के 12 राज्यों में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ के दूसरे चरण के तहत मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया जोरों पर है। बंगाल में इस मुद्दे पर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच पहले से ही कूटनीतिक और कानूनी खींचतान जारी है। चूंकि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होना है, इसलिए अदालत ने प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 15 फरवरी से पहले प्राप्त सभी लंबित दस्तावेजों को गुरुवार शाम 5 बजे तक न्यायिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुनवाई के दौरान एक तार्किक बिंदु रखा कि कई बार उन छात्रों के पास भी एडमिट कार्ड होता है जिन्होंने परीक्षा नहीं दी या जो परीक्षा में असफल रहे। ऐसे में केवल एडमिट कार्ड को आयु या पहचान का पुख्ता प्रमाण मानना गलत होगा। इस दलील से सहमत होते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जन्मतिथि और पिता का नाम साबित करने के लिए मार्कशीट और पास सर्टिफिकेट अनिवार्य है। एडमिट कार्ड का मूल्य केवल उस सर्टिफिकेट के सहायक के रूप में ही रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (AERO) को कड़ी चेतावनी दी है कि वे दस्तावेजों के सत्यापन में किसी भी प्रकार की देरी न करें। कोर्ट ने 24 फरवरी 2026 के अपने पिछले आदेश का हवाला देते हुए डेटा अपलोडिंग की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा है। इस फैसले के बाद अब बंगाल में उन वोटरों के आवेदनों की दोबारा बारीकी से जांच होगी जिन्होंने केवल माध्यमिक परीक्षा के प्रवेश पत्र (Admit Card) के आधार पर अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने का दावा पेश किया था।
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