Astrology Remedies : हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में प्रकृति को साक्षात ईश्वर का रूप मानकर पूजा जाता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने पर्यावरण के संरक्षण को धर्म से जोड़ते हुए पेड़ों को सिर्फ हरियाली का माध्यम नहीं, बल्कि देवी-देवताओं का पवित्र निवास स्थान बताया है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी विशेष देवी-देवता को समर्पित होता है। ऐसे में यदि हम उस दिन से संबंधित पवित्र वृक्ष की आराधना करते हैं, तो हमारे जीवन के तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि सप्ताह के किस दिन किस वृक्ष की पूजा करने से कौन सा विशेष फल प्राप्त होता है।

रविवार को आक के पौधे की आराधना
सप्ताह का पहला दिन रविवार प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आक (मदार) का पौधा सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करता है। रविवार के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर आक के पौधे में शुद्ध जल अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही सूर्य मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से समाज में व्यक्ति का मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास तेजी से बढ़ता है। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य ग्रह से संबंधित कोई दोष होता है, उनके लिए यह उपाय बेहद चमत्कारी और लाभकारी सिद्ध होता है।

सोमवार को बेलपत्र के वृक्ष का पूजन
सोमवार का दिन देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। शिव जी की पूजा में बेलपत्र का क्या महत्व है, यह किसी से छिपा नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, बेल के वृक्ष की जड़ों और पत्तों में स्वयं साक्षात भगवान शिव का वास होता है। सोमवार के दिन बेल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करने और उसकी परिक्रमा करने से शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इस साधारण से उपाय को नियमित करने से जातक के जीवन में मानसिक सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हमेशा बना रहता है।
मंगलवार को नीम के पेड़ की सेवा
मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी और साहस के कारक मंगल ग्रह से संबंधित है। इस दिन औषधीय गुणों से भरपूर नीम के वृक्ष की पूजा करने का विधान है। लोक मान्यताओं के अनुसार, नीम के पेड़ में साक्षात देवी शक्तियों और मां दुर्गा का वास माना जाता है। मंगलवार की शाम को नीम के पेड़ के नीचे सरसों के तेल या चमेली के तेल का दीपक जलाने से घर-परिवार में मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
बुधवार को कदंब वृक्ष की महिमा
बुधवार का दिन बुद्धि के दाता भगवान गणेश, श्रीहरि के अवतार भगवान श्रीकृष्ण और बुध ग्रह को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने वृंदावन में यमुना किनारे कदंब के वृक्षों के नीचे ही अपनी तमाम दिव्य रासलीलाएं रची थीं, इसलिए यह वृक्ष उन्हें अत्यंत प्रिय है। बुधवार के दिन कदंब के पेड़ की पूजा करने और उसकी देखरेख करने से मनुष्य की बुद्धि कुशाग्र होती है, शिक्षा के क्षेत्र में अपार ज्ञान मिलता है और व्यापार में आ रही तमाम अड़चनें दूर होकर धन लाभ के योग बनते हैं।
गुरुवार को केले के पेड़ का व्रत और विधान
गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित है। इस दिन केले के वृक्ष की पूजा का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। विशेषकर महिलाएं इस दिन व्रत रखकर केले के पेड़ की जड़ में हल्दी मिश्रित जल, चने की दाल और गुड़ अर्पित करती हैं। माना जाता है कि केले के वृक्ष में भगवान विष्णु का साक्षात वास होता है। गुरुवार को सच्चे मन से की गई यह पूजा वैवाहिक जीवन की खटास को दूर कर उसमें मधुरता लाती है, योग्य जीवनसाथी की तलाश पूरी करती है और परिवार को धन-धान्य से समृद्ध बनाती है।
शुक्रवार को आंवले के वृक्ष की महापूजा
शुक्रवार का दिन धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी तथा संतोषी माता की साधना के लिए आरक्षित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के वृक्ष के प्रत्येक हिस्से में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी संयुक्त रूप से निवास करते हैं। यही कारण है कि इसे अत्यंत पूजनीय माना गया है। शुक्रवार के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने, वहां शुद्ध घी का दीपक जलाने और उसकी परिक्रमा करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता का समूल नाश हो जाता है। यह उपाय आर्थिक तंगियों और कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने में बेहद सहायक माना जाता है।
शनिवार को पीपल के पेड़ की महा-आराधना
शनिवार का दिन न्याय के देवता कर्मफलदाता शनिदेव को समर्पित है और इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का शास्त्रों में विशेष महात्म्य बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के पेड़ के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में महादेव का वास होता है। शनिवार के दिन सूर्योदय के बाद पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाने और सूर्यास्त के बाद उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर सात बार परिक्रमा करने से कुंडली में मौजूद भयंकर से भयंकर शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शांत होता है। इससे जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं और कष्ट पल भर में दूर हो जाते हैं।
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