WB Election 2026
WB Election 2026: पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं, वहीं भाजपा बंगाल के सियासी दुर्ग को फतह करने की हरसंभव कोशिश में जुटी है। इसी कड़ी में बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखे हमले किए हैं।
रविवार को मीडिया से रूबरू होते हुए सुवेंदु अधिकारी ने सुरक्षा के मुद्दे पर टीएमसी को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल शासन में पश्चिम बंगाल उग्रवादी गतिविधियों का सुरक्षित केंद्र बन चुका है। हाल की गिरफ्तारियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “कश्मीर एसटीएफ ने कुछ समय पहले जावेद मुंशी को पकड़ा था और असम एसटीएफ ने भी मुर्शिदाबाद से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। टीएमसी ने बंगाल को उग्रवादियों का सुरक्षित ठिकाना बना दिया है।” अधिकारी ने जोर देकर कहा कि सभी राष्ट्रवादी लोग एकजुट होकर इस व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
सुवेंदु अधिकारी ने मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर भी राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग केवल एक त्रुटिहीन वोटर लिस्ट प्राप्त करना है। अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची में चार प्रमुख विसंगतियां कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी: पहला—मृत व्यक्तियों के नाम, दूसरा—फर्जी वोटरों की प्रविष्टि, तीसरा—एक ही व्यक्ति का कई जगहों पर पंजीकरण, और चौथा—गैर-भारतीय नागरिकों या अवैध घुसपैठियों के नाम। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार इसमें पारदर्शिता का अभाव है।
अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर सुवेंदु अधिकारी ने अपनी बात बेहद स्पष्टता से रखी। उन्होंने कहा कि जो भारतीय नागरिक हैं, चाहे उनका धर्म कोई भी हो, उन्हें मतदाता सूची में रहने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश से आए लोगों को दो श्रेणियों में बांटा। उन्होंने तर्क दिया कि बांग्लादेश से आने वाले हिंदू ‘रिफ्यूजी’ (शरणार्थी) हैं क्योंकि वे अपना धर्म बचाने आए हैं। वहीं, दूसरी ओर अवैध रूप से सीमा पार कर आने वाले घुसपैठिए न केवल संसाधनों पर बोझ हैं, बल्कि वे लव जिहाद जैसी गतिविधियों के जरिए सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं।
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) के माध्यम से जानबूझकर नामों और उपनामों में गलतियाँ की गईं, ताकि आम लोगों को परेशान किया जा सके। उन्होंने तकनीकी युग का हवाला देते हुए पूछा कि जब आज हर सेवा ऑनलाइन उपलब्ध है, तो मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल क्यों नहीं बनाया गया? उन्होंने लोगों को घंटों लाइन में खड़े करने की निंदा की। सुवेंदु ने वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो सबसे पहले प्रदेश की वोटर लिस्ट को पूरी तरह साफ और पारदर्शी बनाया जाएगा।
सुवेंदु अधिकारी के ये बयान साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सुरक्षा, भ्रष्टाचार और नागरिकता जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे। जहाँ टीएमसी इसे बंगाल की पहचान और बाहरी बनाम भीतरी की लड़ाई बना रही है, वहीं भाजपा राष्ट्रवाद और सुशासन के नाम पर मतदाताओं को साधने में लगी है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता इस सियासी घमासान में किसका साथ देती है।
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