Bengal Voting Percentage
Bengal Voting Percentage : पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी महापर्व के दौरान एक तरफ जहाँ प्रकृति की चिलचिलाती गर्मी अपने चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ छिटपुट हिंसा की खबरों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। इसके बावजूद, मतदाताओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। दोपहर तीन बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में मतदान का प्रतिशत 78.77% तक पहुँच गया है, जो राज्य की जागरूक राजनीतिक चेतना को दर्शाता है। लोकतंत्र के इस उत्सव में लंबी कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि लोग बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा चिंताओं से ऊपर उठकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। निर्वाचन आयोग ने भी मतदान के इन ऊंचे आंकड़ों पर संतोष व्यक्त किया है।
सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में भी लोगों के बीच वोटिंग को लेकर जबरदस्त जोश देखने को मिला है। तमिलनाडु में दोपहर तीन बजे तक मतदान का आंकड़ा 70% को छू चुका था। वहाँ के केंद्रों पर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की सक्रिय भागीदारी देखी गई। तमिलनाडु की साक्षरता और राजनीतिक जागरूकता ने एक बार फिर साबित किया कि राज्य की जनता अपनी सरकार चुनने की प्रक्रिया को लेकर कितनी गंभीर है। शांतिपूर्ण मतदान और मतदाताओं की भारी भीड़ ने चुनाव आयोग की तैयारियों को सफल बनाया है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो बंगाल के लगभग हर हिस्से में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। दोपहर एक बजे तक के प्रारंभिक रुझानों में ही कई जिलों ने 60% का आंकड़ा पार कर लिया था। मालदा में जहाँ 58.45% मतदान हुआ, वहीं मुर्शिदाबाद ने 62.71% के साथ अपनी सक्रियता दर्ज कराई। औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों में भी मतदान का संतुलन बना रहा, जहाँ पश्चिम वर्धमान में 60.37% और पश्चिम मेदिनीपुर में रिकॉर्ड 65.77% वोटिंग दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ग्रामीण मतदाता अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग दिख रहे हैं।
उत्तर बंगाल और पहाड़ी क्षेत्रों में भी मतदान की प्रक्रिया काफी प्रभावी रही। कैलिम्पोंग में 59.52% और दार्जिलिंग में 59.81% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में, जहाँ अक्सर राजनीतिक सरगर्मियां तेज रहती हैं, क्रमशः 60.84% और 60.75% मतदान हुआ। अलीपुरद्वार में भी 60.03% के साथ मतदाताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दक्षिण दिनाजपुर और उत्तरी दिनाजपुर में भी मतदान का प्रतिशत क्रमशः 63.05% और 60% रहा, जो यह बताता है कि राज्य के सुदूर इलाकों में भी लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं।
बांकुरा, झारग्राम और पुरुलिया जैसे जिलों, जिन्हें कभी अशांत क्षेत्र माना जाता था, वहाँ से आए आंकड़े सुखद आश्चर्य पैदा करते हैं। झारग्राम में 65.31% और बांकुरा में 64.58% मतदान यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों की जनता अब विकास और शांति के लिए वोट कर रही है। पुरुलिया में 59.83% और बीरभूम में 63.93% मतदान दर्ज किया गया। पूर्वी मेदिनीपुर में 62.90% के साथ लोगों ने लोकतंत्र को मजबूत करने का संकल्प दोहराया। चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के बीच, हिंसा की आशंकाओं को दरकिनार करते हुए बंगाल की जनता ने रिकॉर्ड मतदान की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
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