West Bengal Politics
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर ने शनिवार को ममता बनर्जी का साथ छोड़कर अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी कर ली है। गौरतलब है कि मौसम नूर जनवरी 2019 में कांग्रेस का दामन छोड़कर तृणमूल में शामिल हुई थीं। सात साल के लंबे अंतराल के बाद, उन्होंने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय (24 अकबर रोड) पहुँचकर औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। बंगाल की राजनीति में इसे तृणमूल के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस में शामिल होने के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार और मालदा उत्तर से कांग्रेस सांसद व मौसम के भाई ईशा खान चौधरी मौजूद रहे। कांग्रेस का हाथ थामने के तुरंत बाद मौसम नूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना इस्तीफा तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को भेज दिया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे सोमवार को राज्यसभा सभापति के कार्यालय में अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप देंगी। हालांकि उनके राज्यसभा कार्यकाल के कुछ ही महीने शेष थे, लेकिन चुनाव से पहले इस कदम ने बंगाल के समीकरण बदल दिए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भावुक होते हुए मौसम नूर ने कहा, “मैं दिवंगत बरकत गनी खान चौधरी साहेब के परिवार की सदस्य हूँ। मैं उनकी राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ा रही हूँ। हमने अपने परिवार में विस्तृत चर्चा की और सर्वसम्मति से कांग्रेस में लौटने का फैसला लिया।” दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस या ममता बनर्जी के खिलाफ कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि तृणमूल ने उन्हें काम करने का भरपूर मौका दिया, राज्यसभा भेजा और जिला अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। उन्होंने ममता बनर्जी को ‘हमारी नेता’ कहकर संबोधित किया, जो उनके मन में दीदी के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टी के सांसद को अपने पाले में लाने के सवाल पर जयराम रमेश ने चुटकी लेने से गुरेज़ नहीं किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यह सुनकर सुखद आश्चर्य हो रहा है कि आज कुछ लोगों को ‘इंडिया अलायंस’ की याद आ रही है। कुछ समय पहले तक तो वे इस गठबंधन का नाम तक नहीं लेना चाहते थे।” रमेश ने मौसम नूर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे दो बार सांसद और युवा कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी वापसी से पार्टी को बंगाल में नई ऊर्जा मिलेगी।
इस अवसर पर बंगाल कांग्रेस के पर्यवेक्षक गुलाम अहमद मीर ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि मौसम नूर का कांग्रेस में वापस आना इस बात का प्रमाण है कि बंगाल में कांग्रेस अभी भी पूरी तरह जिंदा और सक्रिय है। उन्होंने कहा कि पार्टी बंगाल में हर स्तर पर खुद को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है और आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरे कांग्रेस से जुड़ सकते हैं। मालदा और उत्तर बंगाल के इलाकों में मौसम नूर के आने से कांग्रेस की स्थिति काफी सुदृढ़ होने की उम्मीद है, जहाँ गनी खान चौधरी परिवार का आज भी खासा प्रभाव है।
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