WhatsApp Plus
लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप ने अपना नया पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल ‘व्हाट्सऐप प्लस’ (WhatsApp Plus) रोल आउट करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में इसे चुनिंदा क्षेत्रों में आईफोन (iOS) यूजर्स के लिए पेश किया गया है, जबकि एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर अभी इसकी बीटा टेस्टिंग चल रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में इसे सभी एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स के लिए भी उपलब्ध करा दिया जाएगा। हालांकि, यदि आप इस नए सब्सक्रिप्शन प्लान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, तो इसके शुरुआती फीचर्स आपको काफी हद तक निराश कर सकते हैं। जानकारों का मानना है कि इस प्लान की कीमत के मुकाबले इसमें मिलने वाले फीचर्स बेहद साधारण हैं और वे इस खर्च को सही साबित नहीं करते हैं।
हालांकि यह नया सब्सक्रिप्शन प्लान अभी अपने बेहद शुरुआती चरण में है, लेकिन वर्तमान में इसमें कोई भी ऐसा क्रांतिकारी या बेहद उपयोगी फीचर नहीं दिख रहा है, जिसके लिए लोग अलग से पैसे खर्च करना चाहें। विशेष रूप से भारत जैसे प्राइस-सेंसेटिव (कीमत को लेकर संवेदनशील) बाजार में, जहां लोग मुफ्त सेवाओं को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, वहां इस तरह के पेड सब्सक्रिप्शन के लिए यूजर्स को राजी करना कंपनी के लिए एक बेहद टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
व्हाट्सऐप प्लस को फिलहाल यूरोप के कुछ सीमित क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया गया है। वहां इसकी मासिक कीमत लगभग 2.99 यूरो यानी भारतीय मुद्रा में करीब 280 रुपये प्रति महीना निर्धारित की गई है। इस कीमत को देखते हुए यूजर्स को उम्मीद थी कि उन्हें कुछ विशेष तकनीकी या सुरक्षा से जुड़े फीचर्स मिलेंगे, लेकिन कंपनी ने अभी केवल ऊपरी दिखावे (कॉस्मेटिक) वाले बदलावों पर ही ध्यान केंद्रित किया है, जो आम यूजर्स की रोजमर्रा की खास जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं।
इस नए प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान के तहत यूजर्स को कई कस्टमाइजेशन ऑप्शंस दिए जा रहे हैं। इसमें नई आकर्षक थीम्स, अलग-अलग ऐप आइकन्स, एक साथ अधिकतम 20 जरूरी चैट्स को टॉप पर पिन करने की सुविधा, प्रीमियम रिंगटोन्स, चैट लिस्ट को अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज करने का विकल्प और स्पेशल विजुअल इफेक्ट्स वाले प्रीमियम स्टिकर्स शामिल हैं। अगर इसमें से 20 चैट्स को एक साथ पिन करने की काम की सुविधा को हटा दिया जाए, तो बाकी के फीचर्स यूजर के अनुभव पर कोई बड़ा या खास सकारात्मक असर नहीं डालते हैं। केवल चैट पिन करने के लिए हर महीने 280 रुपये खर्च करना किसी भी समझदार यूजर के लिए घाटे का सौदा ही माना जाएगा।
कंपनी ने इस योजना को अभी मुख्य रूप से यूजर फीडबैक (उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया) प्राप्त करने के उद्देश्य से बाजार में उतारा है। एक बार जब इस प्लान का दायरा बढ़ेगा और अधिक यूजर्स इससे जुड़ेंगे, तब कंपनी इसमें कुछ नए और वास्तव में उपयोगी फीचर्स को जोड़ सकती है। इसके साथ ही, भारत जैसी विशाल और महत्वपूर्ण मार्केट को ध्यान में रखते हुए व्हाट्सऐप इसकी मासिक कीमत को काफी कम भी कर सकता है। राहत की बात यह है कि व्हाट्सऐप की मुख्य सेवाएं जैसे मैसेजिंग, वॉयस व वीडियो कॉलिंग और मीडिया फाइल शेयरिंग हमेशा की तरह पूरी तरह से मुफ्त बनी रहेंगी।
यह पहली बार नहीं है जब व्हाट्सऐप अपने प्लेटफॉर्म पर पैसे लेने की कोशिश कर रहा है। साल 2013 से 2016 के बीच, व्हाट्सऐप केवल पहले साल के लिए ही मुफ्त उपलब्ध होता था। इसके बाद, दूसरे साल से सेवा जारी रखने के लिए यूजर्स से लगभग 1 डॉलर प्रति वर्ष की मामूली फीस ली जाती थी। भले ही वह रकम बहुत कम थी, लेकिन उस पेड मॉडल के कारण कंपनी को नए यूजर्स जोड़ने और कई विकासशील देशों में अपना यूजर बेस बनाए रखने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इस गलती को सुधारते हुए कंपनी ने बाद में इसे पूरी तरह मुफ्त कर दिया, जिसके बाद ही इसके यूजर्स की संख्या अरबों में पहुंच सकी।
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