WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करने वालों के लिए SIM-बाइंडिंग नियम महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकार के निर्देशों के अनुसार, ऐप अकाउंट को उस सिम कार्ड से जोड़कर रखने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है, जिससे मोबाइल नंबर रजिस्टर किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कंपनियों को अनुपालन के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है और नियम 1 जनवरी से लागू होने की बात कही गई है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव लागू होने वाली तकनीकी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
क्या है SIM-बाइंडिंग का नया नियम?
फिलहाल ज्यादातर मैसेजिंग ऐप में मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद SMS या कॉल से मिले OTP के जरिए वेरिफिकेशन किया जाता है। एक बार अकाउंट सक्रिय होने के बाद कई मामलों में सिम निकालने या बदलने पर भी ऐप चलता रहता है। नए नियम का उद्देश्य अकाउंट और रजिस्टर्ड सिम के बीच संबंध बनाए रखना है। इससे निष्क्रिय या अनुपस्थित सिम वाले डिवाइस पर ऐप इस्तेमाल करने के तरीके में बदलाव आ सकता है।
सरकार क्यों लागू करना चाहती है यह व्यवस्था?
दूरसंचार विभाग (DoT) का कहना है कि साइबर अपराधी मोबाइल नंबरों और मैसेजिंग अकाउंट का दुरुपयोग करके लोगों को निशाना बनाते हैं। ठग सरकारी अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी देते हैं और लोगों से पैसे वसूलते हैं। सरकार के मुताबिक, सिम और अकाउंट के बीच संबंध बनाए रखने से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने तथा मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
किन मैसेजिंग ऐप्स पर पड़ सकता है असर?
28 नवंबर 2025 के आदेश के तहत WhatsApp, Telegram, Snapchat, Arattai, ShareChat, Josh, JioChat और Signal जैसे प्लेटफॉर्म इस व्यवस्था के दायरे में बताए गए हैं। भारत में WhatsApp का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए नियम लागू होने पर व्यक्तिगत यूजर्स, परिवारों और कारोबारियों को इसके प्रभाव समझने होंगे।
सिम बदलने और WhatsApp Web इस्तेमाल करने पर क्या होगा?
यदि रजिस्टर्ड सिम बंद हो जाती है या फोन से निकाल दी जाती है, तो ऐप की कुछ सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, सिम हटाते ही हर यूजर का अकाउंट निश्चित रूप से बंद हो जाएगा, ऐसा निष्कर्ष लागू नियमों और ऐप की अंतिम तकनीकी व्यवस्था देखे बिना नहीं निकालना चाहिए।
WhatsApp Web और दूसरे लिंक किए गए डिवाइस पर दोबारा वेरिफिकेशन या QR कोड से लिंक करने की जरूरत पड़ सकती है। बिना सिम वाले टैबलेट, एक से ज्यादा फोन इस्तेमाल करने वालों और विदेश यात्रा के दौरान स्थानीय सिम लगाने वाले यूजर्स को भी संभावित बदलावों पर ध्यान देना होगा।
कंपनियों को क्यों मिली अतिरिक्त समयसीमा?
रिपोर्टों के अनुसार, तकनीकी चुनौतियों और उद्योग जगत की चिंताओं के बाद अनुपालन की समयसीमा बढ़ाई गई। WhatsApp Web के लिए बार-बार लॉगआउट की व्यवस्था में भी जोखिम आधारित बदलाव की जानकारी सामने आई है। कंपनी द्वारा फीचर की टेस्टिंग की खबरों के बीच अंतिम व्यवस्था पर नजर रखना जरूरी है।
यूजर्स और छोटे कारोबारियों की चिंता
CUTS International के सर्वे में उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों ने संभावित परेशानियों को लेकर चिंता जताई। छोटे व्यवसाय WhatsApp के जरिए ग्राहकों से संपर्क, ऑर्डर और भुगतान संबंधी जानकारी साझा करते हैं। नियमों के अनुपालन में कमी होने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
आगे क्या होगा?
दूरसंचार विभाग मोबाइल नंबरों की प्रामाणिकता जांचने के लिए Mobile Number Verification प्लेटफॉर्म लाने की योजना पर भी काम कर रहा है। यूजर्स को सलाह है कि वे आधिकारिक सरकारी निर्देशों और ऐप कंपनियों की घोषणाओं पर नजर रखें तथा किसी अनजान लिंक से अपना OTP साझा न करें।
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