Datia By Election : मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने शनिवार को अपने दिग्गज नेता घनश्याम सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस का यह फैसला ऐसे नाजुक वक्त पर आया है जब भाजपा के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर भारी असंतोष और बगावत के सुर सुनाई दे रहे हैं। दतिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले घनश्याम सिंह का मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से होगा। कांग्रेस के इस फैसले को भाजपा के असंतुष्ट समर्थकों की नाराजगी भुनाने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। घनश्याम सिंह का पार्टी के प्रति समर्पण और उनकी जमीनी पकड़ इस चुनाव को बेहद रोचक बनाने वाली है।

घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर: अनुभवी चेहरे पर कांग्रेस की दांव
घनश्याम सिंह कांग्रेस के एक अनुभवी और मंझे हुए राजनेता हैं। उनका राजनीतिक करियर लंबा रहा है। उन्होंने पहली बार 1993 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि 1998 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2003 में फिर से विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने 2018 में सेवढ़ा सीट से भी चुनाव लड़ा था। अनुभवी होने के साथ-साथ दतिया और सेवढ़ा के क्षेत्रों में उनकी गहरी पकड़ है। पार्टी द्वारा टिकट दिए जाने पर उन्होंने शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि दतिया में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार हावी है, और उनकी प्राथमिकता इसे खत्म करना है।

भ्रष्टाचार और बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं: घनश्याम सिंह का चुनावी एजेंडा
उम्मीदवारी के ऐलान के बाद घनश्याम सिंह ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए हैं। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में दतिया में इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर जो विकास हुआ, उसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत बेहद खराब है। उनके अनुसार, “हमारी लड़ाई इस बात के लिए है कि विकास का फायदा सीधे आम जनता को मिले।” उनकी बेटी मांडवी राजे ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे दतिया को ‘भयमुक्त’ बनाने के संकल्प के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।
भाजपा में मची खलबली: नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का फूटा गुस्सा
इधर भाजपा के लिए यह चुनाव फिलहाल आंतरिक कलह का कारण बन गया है। पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार कर आशुतोष तिवारी को टिकट दिया, जिससे मिश्रा के समर्थकों में भारी आक्रोश है। समर्थकों ने इस्तीफों की झड़ी लगा दी है और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर 12 घंटे तक चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि नाराज समर्थकों ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसमें पुलिस अधीक्षक समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। भाजपा की यह अंदरूनी खींचतान दतिया के चुनावी समीकरणों को कांग्रेस के पक्ष में मोड़ने की कोशिश में है। अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस इस मौके का फायदा उठाकर सीट अपने नाम कर पाएगी।
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