IND vs PAK
IND vs PAK: क्रिकेट जगत की सबसे बड़ी राइवलरी, भारत बनाम पाकिस्तान, इस समय अनिश्चितता के भंवर में फंसी है। 15 फरवरी 2026 को कोलंबो में होने वाले इस मैच को लेकर पाकिस्तान सरकार के कड़े रुख ने आईसीसी (ICC) की रातों की नींद उड़ा दी है। दरअसल, पाकिस्तान ने बांग्लादेश के टूर्नामेंट से बाहर होने के विरोध में भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की घोषणा की है। इस गतिरोध को सुलझाने के लिए अब आईसीसी ने अपने सबसे भरोसेमंद ‘संकटमोचक’ इमरान ख्वाजा को मैदान में उतारा है। 8 फरवरी को ख्वाजा खुद लाहौर पहुंचे हैं ताकि पीसीबी (PCB) के साथ सीधी बातचीत कर इस $500 मिलियन (लगभग 4,500 करोड़ रुपये) के नुकसान वाले संकट को टाला जा सके।
इमरान ख्वाजा कोई साधारण नाम नहीं हैं; वे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के डिप्टी चेयरमैन हैं। 64 वर्षीय ख्वाजा मूल रूप से सिंगापुर के रहने वाले हैं और पेशे से एक बेहद सफल वकील हैं। वे लंबे समय से आईसीसी के आंतरिक कामकाज और संविधान को आकार देने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। ख्वाजा की सबसे बड़ी खासियत उनका ‘लो-प्रोफाइल’ रहना और जटिल विवादों को बिना किसी शोर-शराबे के सुलझाना है। वे आईसीसी में एसोसिएट देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं और क्रिकेट जगत में उन्हें एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में देखा जाता है।
इमरान ख्वाजा का आईसीसी में सफर काफी प्रभावशाली रहा है। वे 2017 से लगातार डिप्टी चेयरमैन के पद पर काबिज हैं। साल 2020 में जब तत्कालीन अध्यक्ष शशांक मनोहर ने अपने पद से इस्तीफा दिया था, तब ख्वाजा ने ही अंतरिम अध्यक्ष के रूप में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान आईसीसी की बागडोर संभाली थी। वर्तमान में वे आईसीसी के चेयरमैन जय शाह के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ख्वाजा को आईसीसी के वित्त और वाणिज्यिक मामलों की समिति (F&CA) का भी गहरा अनुभव है, जो इस समय भारत-पाक मैच के वित्तीय पहलुओं को सुलझाने में काम आ रहा है।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान ख्वाजा की लाहौर यात्रा के दौरान पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने उनके सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। इनमें बांग्लादेश के लिए मुआवजे की मांग और भविष्य में आईसीसी आयोजनों की मेजबानी के अधिकार शामिल हैं। ख्वाजा की क्षमता इसी बात में है कि वे पाकिस्तान सरकार और पीसीबी के बीच पुल का काम कर रहे हैं। वे एक प्रमाणित मध्यस्थ (Certified Mediator) भी हैं, जिसका लाभ उन्हें कड़े फैसलों को नरम करने में मिल रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी मध्यस्थता के बाद पाकिस्तान अपना बहिष्कार का फैसला वापस ले सकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट केवल खेल नहीं, बल्कि भावनाओं और बड़े व्यापार का मामला है। आईसीसी जानती है कि अगर यह मैच नहीं हुआ, तो ब्रॉडकास्टर्स और प्रायोजकों को भारी घाटा होगा। ऐसे में एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जिसका भरोसा भारत (BCCI) और पाकिस्तान (PCB) दोनों को हो। इमरान ख्वाजा ने वर्षों से एसोसिएट और फुल मेंबर्स के बीच संतुलन बनाए रखा है, जिससे वे इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने के लिए सबसे योग्य व्यक्ति बन गए हैं।
फिलहाल गेंद पाकिस्तान के पाले में है। इमरान ख्वाजा की लाहौर में हुई बैठकों के बाद एक ‘सकारात्मक संकेत’ मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस पर अंतिम फैसला लेंगे। यदि ख्वाजा इस मिशन में सफल होते हैं, तो यह न केवल क्रिकेट फैंस के लिए जीत होगी, बल्कि एक प्रशासक के रूप में उनके कद को और भी ऊंचा कर देगी।
Gas Delivery OTP Rule : मई का महीना शुरू होते ही आम आदमी और व्यापारियों…
Mental Health Awareness : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) से…
Bada Mangal Dates : हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का विशेष महत्व है,…
Sakti News: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां शनिवार…
Bilaspur Murder Case : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है,…
Reel Death : उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन देखने को…
This website uses cookies.