कुरान की कसम क्यों खाई?
Omar Abdullah Quran: जम्मू-कश्मीर में 11 नवंबर 2025 को होने वाले बडगाम और नगरोटा विधानसभा सीटों के उपचुनाव से पहले राजनीय पारा चढ़ गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बीच, भाजपा नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर बड़ा आरोप लगाया है कि उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी के साथ गठबंधन का प्रयास किया था।
सुनील शर्मा ने दावा किया कि उमर अब्दुल्ला 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए बीजेपी के नेताओं से दिल्ली में मुलाकात कर चुके थे। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उमर ने ऐसा नहीं किया तो वह किसी मस्जिद या धार्मिक स्थल पर कसम खाएं कि उन्होंने बीजेपी से गठबंधन की कोशिश नहीं की। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल में हलचल मच गई।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुनील शर्मा के आरोपों का जवाब बेहद सख्ती से दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा,“मैं कुरान की कसम खाता हूं कि मैंने 2024 में राज्य का दर्जा पाने या किसी भी राजनीतिक कारण से बीजेपी के साथ किसी तरह का गठबंधन करने की कोशिश नहीं की।”उमर ने कहा कि बीजेपी नेता जानबूझकर झूठ फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हमेशा बीजेपी की नीतियों का विरोध किया है।
बडगाम सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि उमर अब्दुल्ला ने 2024 के विधानसभा चुनाव में बडगाम और गंदेरबल दोनों सीटों से जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में उन्होंने बडगाम सीट छोड़ दी। वहीं, नगरोटा सीट बीजेपी विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई।जैसे-जैसे 11 नवंबर को मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। दोनों दल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर एक-दूसरे पर निशाना साधकर उपचुनाव से पहले माहौल को और गरमा रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, बडगाम और नगरोटा सीटें जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक समीकरणों को तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप से यह साफ हो रहा है कि दोनों दलों के लिए ये उपचुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। उम्मीदवारों की लोकप्रियता और पार्टी की रणनीति ही अंतिम परिणाम तय करेगी।
जम्मू-कश्मीर के बडगाम और नगरोटा उपचुनाव में सियासी तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सुनील शर्मा और उमर अब्दुल्ला के बीच आरोप-प्रत्यारोप से मतदाता भी इस जंग को करीब से देख रहे हैं। 11 नवंबर को मतदान के बाद ही पता चलेगा कि जनता किसकी रणनीति और बयानबाजी पर भरोसा जताती है।
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