Dussehra 2025 ritual: दशहरे पर शमी की पूजा क्यों है खास? जानें विजय, धन और सौभाग्य से जुड़ा रहस्य

Dussehra 2025 ritual: दशहरा या विजयादशमी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण और शुभ पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की रक्षा की थी। हालांकि दशहरे का महत्त्व केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन एक और महत्वपूर्ण परंपरा है  शमी वृक्ष की पूजा। शमी पूजन को धर्म, पुराण और ज्योतिष तीनों दृष्टिकोणों से अत्यंत फलदायी माना गया है। आइए जानें दशहरे पर शमी की पूजा क्यों खास है और इसके पीछे छुपा है क्या रहस्य।

ads

महाभारत से जुड़ी शमी की कथा

शमी वृक्ष का महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। जब पांडवों को बारह वर्ष के अज्ञातवास पर जाना पड़ा था, तब उन्होंने अपने सभी शस्त्र एक शमी के पेड़ में छिपा दिए थे। बारह साल बाद जब वे वापस लौटे तो उनके शस्त्र पूरी तरह सुरक्षित मिले। यही कारण है कि शमी को विजय, शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। तब से दशहरे के दिन शमी पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा चली आ रही है।

Adst

शमी के पत्ते क्यों कहलाते हैं ‘सोना’

दशहरे के दिन शमी के पत्तों को बांटना एक महत्वपूर्ण परंपरा है, खासकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे ‘सोना बांटना’ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि शमी के पत्ते सोने के समान पवित्र और शुभ होते हैं। इन्हें घर में रखने से लक्ष्मी का वास होता है, जिससे धन-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसलिए दशहरे के दिन लोग शमी के पत्ते अपने घर ले जाकर पूजा स्थलों या तिजोरी में सुरक्षित रखते हैं।

शमी का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शमी वृक्ष शनि ग्रह का प्रिय वृक्ष है। दशहरे के दिन शमी की पूजा करने से शनि दोष शांत होता है और व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है। शमी पूजन से करियर और व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। जो व्यक्ति नियमित रूप से शमी वृक्ष की पूजा करता है, वह शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है और जीवन में सुख-शांति का अनुभव करता है।

शमी पूजा से मिलने वाले लाभ

शत्रुओं और बाधाओं से मुक्ति

शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव का नाश

घर में सुख-शांति और सौभाग्य का वास

धन-समृद्धि की प्राप्ति

कार्यक्षेत्र और व्यापार में सफलता

हर क्षेत्र में विजय और न्याय की प्राप्ति

रावण और शमी का संबंध

कथा के अनुसार, रावण ने अपनी लंका में शमी वृक्ष की विशेष पूजा की थी। इसलिए शमी वृक्ष को युद्ध और विजय का प्रतीक माना जाता है। दक्षिण भारत में दशहरे के अवसर पर लोग शमी के पेड़ के नीचे जाकर पूजा करते हैं और सफलता के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।

दशहरे का पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की जीत नहीं है, बल्कि यह शक्ति, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक भी है। इस दिन शमी वृक्ष की पूजा कर शत्रु बाधा, शनि दोष से मुक्ति और धन-संपदा की प्राप्ति होती है। इसलिए दशहरे पर शमी की पूजा करना अत्यंत शुभ और आवश्यक माना गया है। आप भी इस विजयादशमी पर शमी पूजन कर अपनी जिंदगी में खुशहाली और सफलता का स्वागत करें।

Read More: Childbirth In Space: क्या अंतरिक्ष में पैदा होने वाला बच्चा एलियन जैसा दिखेगा? जानें कैसी होगी शरीर की बनावट

Adst
Admin

Admin

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.