Wildlife Crime
Wildlife Crime: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के घुई वन परिक्षेत्र (Forest Range) में पाए गए बाघ के शव के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बाघ के शव का पोस्टमॉर्टम किए जाने के बाद शुरुआती जाँच में यह पुष्टि हुई है कि करंट लगाकर बाघ की निर्मम हत्या की गई है। इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीव सुरक्षा और वन विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आशंका है कि शिकारियों ने जंगल में अवैध रूप से बिजली का तार बिछाया था, जिसकी चपेट में आने से इस वयस्क बाघ की मौत हो गई।
सूरजपुर के संभागीय वन अधिकारी (DFO) ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि घटनास्थल के निरीक्षण से ऐसे मजबूत संकेत मिले हैं जो यह दर्शाते हैं कि बाघ की हत्या करंट लगाकर की गई है। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध को इंगित किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट होने के बाद, वन विभाग ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए, बाघ के शव का अंतिम संस्कार मौके पर ही कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृत बाघ एक वयस्क नर था जिसकी आयु लगभग 6 वर्ष थी और उसका शव तीन से चार दिन पुराना प्रतीत हो रहा था।
शुरुआत में ही यह घटना शिकार से जुड़ी होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी, क्योंकि बाघ के शरीर के महत्वपूर्ण अंग लापता थे। जाँच में पता चला है कि धारदार हथियार का उपयोग करके बाघ के दाँत और नाखून काट कर निकाल लिए गए थे। बाघ के अंगों को निकाल लेना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह हत्या अवैध शिकार के उद्देश्य से की गई थी। ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद, वन विभाग और रिजर्व फॉरेस्ट की विशेष टीम तुरंत मौके पर पहुंची थी और घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जाँच शुरू की गई थी।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण करंट लगना स्पष्ट होने के बाद, वन विभाग ने अब आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है। अधिकारियों का दावा है कि जाँच के दौरान उन्हें कुछ महत्वपूर्ण क्लू (सुराग) मिले हैं और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वन्यजीव अपराधों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत, विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
बाघ जैसे अत्यंत संरक्षित वन्यजीव की हत्या के इस मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस वन परिक्षेत्र में बाघ की आवाजाही थी, उसकी जानकारी विभाग को क्यों नहीं थी, यह एक बड़ा प्रश्न है। विभाग द्वारा लगातार टाइगर की निगरानी और संरक्षण के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद एक वयस्क बाघ का करंट लगाकर शिकार हो जाना विभाग की सक्रियता पर संदेह पैदा करता है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने विभाग से इस क्षेत्र में गश्त और खुफिया जानकारी जुटाने की व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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