@Thetarget365 : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में अपने मुकदमे की शुरुआत से ही एक तरह से कोने में फंसी हुई हैं। सरकारी वकील ताजुल इस्लाम सुनवाई के दौरान एक के बाद एक हसीना के नकारात्मक निर्णयों और कार्यों को उजागर कर रहे हैं।
यह पहली बार है कि इस तरह की सुनवाई का सीधा प्रसारण किया जा रहा है। रविवार को सुनवाई के दौरान मुख्य अभियोजक ने कहा, “जांच रिपोर्ट के अनुसार, शेख हसीना ने अगस्त में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस को सीधे तौर पर अपनी पार्टी के सदस्यों के खिलाफ नरसंहार करने का आदेश दिया था। मानवता के खिलाफ अपराध पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से किए गए थे।” लाइव सुनवाई के दौरान वीडियो को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा, विभिन्न एजेंसियों के साथ गुप्त संचार के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए।
शेख हसीना के खिलाफ मामले की सुनवाई रविवार को दोपहर 12 बजे अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में शुरू हुई। इसका सीधा प्रसारण किया जा रहा है। मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम हसीना के खिलाफ एक के बाद एक अपराध की जानकारी पेश कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि शेख हसीना ने सरकार में शीर्ष पद पर रहते हुए अपनी शक्ति का घोर दुरुपयोग किया है।
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उन्होंने पुलिस और सरकार के सभी स्तरों के अधिकारियों को आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन को दबाने का निर्देश दिया। विभिन्न एजेंसियों को दिए गए उनके निर्देशों की बातचीत को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। सरकारी वकील का दावा है कि इस जानकारी और साक्ष्य से यह स्पष्ट है कि पिछले अगस्त में मानवता के खिलाफ अपराध करने वाले संगठन का ‘प्रमुख’ उस देश का पूर्व प्रधानमंत्री था।
न केवल शेख हसीना, बल्कि उनकी सरकार के दो अन्य मंत्री भी वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल मामुन। उन सभी पर नरसंहार की योजना बनाने और उसमें भाग लेने का आरोप है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सुधार-विरोधी छात्र आंदोलन के दौरान कम से कम 1,500 लोग मारे गए। 25,000 से अधिक घायल हुए।