Woman Naxal surrender: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार और सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। 8 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली जानसी उर्फ वछेला ने सोमवार को गरियाबंद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। जानसी कुख्यात नक्सली सत्यम गावड़े की पत्नी है, जो हाल ही में एक मुठभेड़ में मारा गया था। जानसी छत्तीसगढ़ में नगर एरिया कमेटी की सचिव के रूप में कार्यरत थी और संगठन में उसका रुतबा काफी ऊंचा था।

कौन है जानसी?
जानसी नक्सली संगठन की एक सीनियर लीडर थी और पिछले कई वर्षों से गरियाबंद, धमतरी और ओडिशा के नुआपाड़ा इलाके में सक्रिय थी। उसके खिलाफ कई संगीन मामलों में वारंट भी जारी थे। जानसी का सरेंडर सुरक्षा बलों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में से आखिरी बचे चेहरों में से एक थी।

कौन था सत्यम गावड़े?
जानसी के पति सत्यम गावड़े नक्सली संगठन के DGN (धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा) डिवीजन कमांडर थे और उस पर ₹65 लाख का इनाम घोषित था। सत्यम को जनवरी 2025 में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी मुठभेड़ में ढेर किया था। इस मुठभेड़ में कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए थे, जिनमें चलपति भी शामिल था। सत्यम की मौत के बाद जानसी संगठन की मुखिया बची थी, लेकिन अब उसका सरेंडर नक्सलियों के लिए एक बड़ा झटका है।
पुनर्वास नीति और परिवार के दबाव में लिया फैसला
गरियाबंद पुलिस अधीक्षक ने प्रेस वार्ता में बताया कि जानसी ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और परिवार के दबाव के चलते आत्मसमर्पण किया। जानसी का कहना है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर वह समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहती है।
पुनर्वास नीति के तहत जानसी को मिलेगा:
आर्थिक सहायता
मकान निर्माण के लिए राशि
बच्चों की शिक्षा
रोज़गार के अवसर
पुलिस की अपील: लौट आएं मुख्यधारा में
गरियाबंद पुलिस ने जानसी के आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ “मेजर ब्रेकथ्रू” बताते हुए बाकी नक्सलियों से भी अपील की है कि वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएं। पुलिस का कहना है कि सरकार ऐसे हर नक्सली को सम्मानजनक जीवन देने को तैयार है जो हिंसा का मार्ग त्यागेगा।
नक्सलवाद के खात्मे की ओर एक और कदम
जानसी के आत्मसमर्पण को गरियाबंद और आसपास के क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे अन्य सक्रिय नक्सलियों पर भी दबाव बनेगा और वे आत्मसमर्पण की राह अपनाएंगे। जानसी का आत्मसमर्पण बताता है कि सरकार की रणनीति – सख्ती के साथ पुनर्वास का संतुलन – सही दिशा में आगे बढ़ रही है। यह घटना न केवल सुरक्षा बलों के लिए एक जीत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब नक्सलवाद की जड़ें कमजोर पड़ रही हैं।
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