Women’s ODI World Cup 2025: विशाखापट्टनम में रविवार को खेले गए महिला वनडे विश्व कप 2025 के मुकाबले में मेजबान भारत को डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के हाथों लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा। इस हाईवोल्टेज मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शानदार 330 रन बनाए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने 49 ओवर में 7 विकेट गंवाकर यह विशाल लक्ष्य हासिल कर लिया। यह मुकाबला महिला क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा टारगेट चेज बन गया है।
भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की। स्मृति मंधाना ने 80 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, वहीं प्रतिका रावल ने 75 रन की पारी से टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों के बीच 155 रनों की साझेदारी ने भारतीय टीम को 300 के पार पहुंचाया। इसके बाद श्री चरणी और दीप्ति शर्मा की भी गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया को काबू में रखने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन अंततः टीम लक्ष्य का बचाव नहीं कर सकी।
ऑस्ट्रेलिया की कप्तान एलिसा हीली ने मैच में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। उन्होंने 142 रन की बेहतरीन पारी खेलते हुए अपनी टीम को जीत की ओर ले गईं। हीली ने भारतीय गेंदबाजों को खुलकर खेलने नहीं दिया और लगातार रन बनाए। वहीं, टीम के अनुभवि बल्लेबाज एलिसा पेरी ने अंत में नर्वस समय में 47 रन बनाकर मैच का पासा पलटा और ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाई।
भारत के लिए एनाबेल सदरलैंड ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने महज 40 रन देकर 5 विकेट झटके। सदरलैंड की गेंदबाजी ने भारत की तेज़तर्रार पारी को थामने की कोशिश की, लेकिन उनका ये कमाल जीत तक नहीं पहुंचा पाया। इसके अलावा श्री चरणी को 3 विकेट मिले, जबकि दीप्ति शर्मा और अमनजोत कौर ने 2-2 विकेट लेकर अपनी टीम को संभालने की कोशिश की।
ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच में 330 रन का पीछा करते हुए यह रिकॉर्ड बनाया कि यह महिला वनडे इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा टारगेट चेज है। इससे पहले इस रिकॉर्ड के मालिक श्रीलंका थी, जिन्होंने 2024 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 305 रन का पीछा किया था। खास बात यह है कि यह ऑस्ट्रेलिया का भारत के खिलाफ सबसे बड़ा रन चेज भी साबित हुआ है, जो भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय है।
यह हार भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय है क्योंकि भारत ने टूर्नामेंट में अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन लगातार हारों से टीम की स्थिति कमजोर हुई है। मेजबान होने के नाते भारतीय टीम पर जनता और विशेषज्ञों की नजरें लगातार बनी हुई हैं। भारतीय बल्लेबाजों ने रन बनाए लेकिन गेंदबाजी और मैच के महत्वपूर्ण क्षणों में दबाव सहन करने में कमी रही।
यह हार भारतीय टीम के लिए एक सख्त सबक है कि बड़े टूर्नामेंट में निरंतरता बनाए रखना कितना जरूरी है। टीम को अपनी कमजोरियों पर काम करना होगा, खासकर गेंदबाजी में, ताकि वे अगले मैचों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने अपनी अनुभव और सामंजस्य का प्रदर्शन करते हुए यह दिखा दिया कि वे इस टूर्नामेंट के सबसे मजबूत दावेदार हैं।
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