WW3 Alert
WW3 Alert: एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दो वैश्विक महाशक्तियों, अमेरिका और चीन के बीच जारी वर्चस्व की जंग अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। दक्षिण कोरिया के समीप पीले सागर (Yellow Sea) के ऊपर अमेरिकी और चीनी फाइटर जेट्स के बीच अचानक हुई तनातनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है। सैन्य विशेषज्ञों ने इस घटना को एक गंभीर ‘एरियल स्टैंड-ऑफ’ करार दिया है। हालांकि, इस दौरान कोई गोलाबारी नहीं हुई, लेकिन दोनों देशों के लड़ाकू विमानों की निकटता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में युद्ध की आहट अब पहले से कहीं अधिक तेज हो गई है।
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब दक्षिण कोरिया स्थित अमेरिका के ओसान एयरबेस से अचानक 10 F-16 लड़ाकू विमानों ने एक साथ उड़ान भरी। सियोल से मात्र 60 किलोमीटर दूर प्योंगटेक बेस से शुरू हुई इस गतिविधि ने क्षेत्र की शांति को अचानक भंग कर दिया। जैसे ही ये अमेरिकी लड़ाकू विमान एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के करीब पहुंचे, चीन के राडार सक्रिय हो गए। प्रतिक्रिया स्वरूप, चीन ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा का हवाला देते हुए तुरंत अपने फाइटर जेट्स को हवा में भेज दिया। दोनों देशों के पायलट एक-दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि जरा सी तकनीकी चूक या गलतफहमी बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती थी।
इस पूरी घटना का सबसे विवादास्पद पहलू यह रहा कि दक्षिण कोरिया की सेना इस अभ्यास का हिस्सा नहीं थी। अमेरिकी सेना (USFK) ने दक्षिण कोरिया को एक्सरसाइज के बारे में एक सामान्य सूचना तो दी थी, लेकिन इस ऑपरेशन का वास्तविक मकसद और विस्तृत प्लान साझा नहीं किया था। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि उन्हें उड़ान की बारीकियों और उड़ान भरने वाले विमानों की संख्या के बारे में पूर्व जानकारी नहीं थी। यह स्थिति काफी असामान्य है, क्योंकि आमतौर पर सियोल और वॉशिंगटन मिलकर सैन्य अभ्यास करते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब कुछ संवेदनशील मिशनों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में बढ़ रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन दक्षिण कोरिया पर अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। वॉशिंगटन की नई नेशनल डिफेंस स्ट्रेटजी के तहत, अब दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया (North Korea) के खतरों के खिलाफ ‘प्राथमिक’ रक्षक की भूमिका निभानी होगी, जबकि अमेरिका केवल सहायक के रूप में मौजूद रहेगा। अमेरिका की इस बदली हुई रणनीति और अचानक होने वाले एकल सैन्य अभ्यासों ने चीन को आशंकित कर दिया है।
चीनी सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग का दावा है कि उनकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अमेरिकी विमानों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए आवश्यक जवाबी कार्रवाई की। चीन को डर है कि अमेरिका की नई सैन्य नीतियां और उसकी बिना बताए होने वाली गतिविधियां दक्षिण चीन सागर और पीले सागर के आसपास के शांतिपूर्ण माहौल को अस्थिर कर सकती हैं। आने वाले दिनों में यह तनाव एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के व्यापारिक मार्गों और राजनयिक संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है।
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