Xi Jinping Purge
Xi Jinping Purge: चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर पिछले एक साल से चल रही उथल-पुथल पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। 11 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण वर्चुअल संबोधन के दौरान जिनपिंग ने स्वीकार किया कि चीनी सेना इस समय भ्रष्टाचार के खिलाफ एक “कठोर और व्यापक” अभियान से गुजर रही है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को ‘क्रांतिकारी पुनर्गठन’ (Revolutionary Forging) का नाम दिया। जिनपिंग के अनुसार, पिछला एक साल सेना के लिए “असामान्य और चुनौतीपूर्ण” रहा है, जहाँ आंतरिक सफाई के लिए कड़े फैसले लेने पड़े।
जिनपिंग की इस कार्रवाई ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है क्योंकि जिन अधिकारियों को हटाया गया है, वे कभी उनके सबसे भरोसेमंद माने जाते थे। जिनपिंग ने खुद इन जनरलों को चुना था, लेकिन अब भ्रष्टाचार और अविश्वास के कारण उन्हें एक-एक कर रास्ते से हटाया जा रहा है।
जनरल झांग यूक्सिया (Zhang Youxia): कभी जिनपिंग के सबसे खास माने जाने वाले इस वरिष्ठ जनरल को जनवरी 2026 में जांच के घेरे में लिया गया। उन पर न केवल भ्रष्टाचार, बल्कि अमेरिका को परमाणु रहस्य लीक करने जैसे देशद्रोह के आरोप भी लगे हैं।
जनरल हे वेइदॉन्ग (He Weidong): ताइवान पर हमले की रणनीति बनाने के लिए मशहूर इस रणनीतिकार को अक्टूबर 2025 में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
चीनी सेना के इस ‘क्लींजिंग ऑपरेशन’ के पीछे के कारण बेहद चौंकाने वाले हैं। खुफिया रिपोर्टों से खुलासा हुआ है कि चीन की जिस ‘रॉकेट फोर्स’ पर जिनपिंग को सबसे ज्यादा गर्व था, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। जांच में पाया गया कि कई परमाणु मिसाइलों के टैंकों में ईंधन (फ्यूल) की जगह पानी भरा गया था। इतना ही नहीं, पश्चिमी चीन में बने मिसाइल साइलो (Silos) के ढक्कन भी तकनीकी खराबी के कारण ठीक से नहीं खुल पा रहे थे। इस स्तर की लापरवाही और धोखे ने जिनपिंग को झकझोर कर रख दिया, जिसके बाद सेना के शीर्ष नेतृत्व पर गाज गिरी।
जिनपिंग का अविश्वास इस कदर बढ़ गया है कि उन्होंने अपनी ही बनाई हुई सर्वोच्च सैन्य संस्था ‘सेंट्रल मिलिट्री कमीशन’ (CMC) को लगभग बदल दिया है। नवंबर 2022 में जिनपिंग ने जिस छह सदस्यीय आयोग को चुना था, उनमें से पांच सदस्यों को 2026 की शुरुआत तक हटाया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब जिनपिंग केवल उन लोगों को सेना की कमान सौंपना चाहते हैं जो उनके प्रति ‘अंधभक्ति’ की हद तक वफादार हों।
विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि इस शुद्धिकरण के पीछे केवल आर्थिक भ्रष्टाचार ही एकमात्र कारण नहीं है। इसके पीछे जिनपिंग का डर और सत्ता खोने का अविश्वास भी काम कर रहा है। उन्हें अंदेशा है कि जो जनरल उनके प्रति 100% वफादार नहीं हैं, वे युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति में उनकी पीठ में छुरा घोंप सकते हैं। बर्खास्त किए गए अधिकारियों पर ‘चेयरमैन रिस्पॉन्सिबिलिटी सिस्टम’ के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि उन्होंने जिनपिंग के आदेशों को सर्वोपरि नहीं माना या स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की कोशिश की।
भले ही जिनपिंग इसे सेना का सुधार कह रहे हों, लेकिन इस व्यापक छंटनी ने पीएलए (PLA) की युद्धक क्षमता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इतने बड़े पैमाने पर अनुभवी नेतृत्व को हटाने से सेना का मनोबल प्रभावित हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘क्रांतिकारी पुनर्गठन’ वास्तव में चीनी सेना को मजबूत बनाएगा या यह केवल जिनपिंग के व्यक्तिगत वर्चस्व को सुरक्षित करने का एक हथकंडा मात्र है।
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